इंदौर में अंगदान से जुड़ी एक महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रक्रिया 19 फरवरी की रात पूरी की गई, जब शहर में दो अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों के त्वरित परिवहन की व्यवस्था की गई। खरगोन निवासी विजय जायसवाल, जो सड़क दुर्घटना के बाद उपचार के दौरान ब्रेन डेड घोषित किए गए थे, उनके परिजनों की सहमति के बाद अंगदान की प्रक्रिया शुरू की गई।
मिली जानकारी के अनुसार पहला ग्रीन कॉरिडोर रात 10:30 बजे ज्यूपिटर विशेष अस्पताल से देवी अहिल्या एयरपोर्ट, इंदौर तक बनाया गया। इसी मार्ग से हृदय को एयरलिफ्ट कर अहमदाबाद भेजा गया। दूसरा ग्रीन कॉरिडोर रात 10:45 बजे ज्यूपिटर विशेष अस्पताल से टी. चोइथराम अस्पताल तक बनाया गया, ताकि किडनी समय पर प्रत्यारोपण केंद्र तक पहुंच सके।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इंदौर में अंगदान को बढ़ाने के लिए शासन के मार्गदर्शन में चिकित्सा संस्थानों द्वारा समन्वित प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में अस्पताल प्रबंधन, ट्रांसप्लांट टीम, ट्रैफिक व्यवस्था और काउंसलिंग एजेंसियों ने संयुक्त रूप से पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से अंजाम दिया।
दुर्घटना के बाद उपचार, फिर ब्रेन डेड की पुष्टि
विजय जायसवाल को 15 फरवरी की सुबह सड़क दुर्घटना के बाद इलाज के लिए ज्यूपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी स्थिति गंभीर रही और बाद में ब्रेन डेड की मेडिकल स्थिति सामने आई। ट्रीटिंग डॉक्टर डॉ. अंशुल जैन और सीनियर इंटेंसिविस्ट डॉ. वरुण देशमुख ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंगदान काउंसलिंग के लिए सूचना दी।
इसके बाद मुस्कान संस्था की टीम ने परिजनों से संपर्क कर अंगदान की औपचारिक काउंसलिंग की। परिवार को चिकित्सकीय स्थिति और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। परिजनों ने सहमति दी, जिसके बाद अस्पताल की ट्रांसप्लांट समन्वय टीम ने विभिन्न केंद्रों के साथ अंग आवंटन और परिवहन की तैयारी शुरू की।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार मृतक की पत्नी श्रीमती आराधना जायसवाल को पूरी स्थिति से अवगत कराया गया। उनकी सहमति के आधार पर हार्ट, लीवर, दोनों किडनी, पैंक्रियास, लंग्स, इंटेस्टाइन और हार्ट वॉल्व दान की अनुमति दर्ज की गई। इसके बाद संबंधित चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत अंग निकासी और परिवहन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
किन मरीजों को मिलेंगे अंग
इस मामले में हृदय अहमदाबाद के मरेंगो सिम्स अस्पताल भेजा गया। लीवर और एक किडनी इंदौर के ज्यूपिटर विशेष अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए निर्धारित की गईं। दूसरी किडनी टी. चोइथराम अस्पताल में भर्ती मरीज के प्रत्यारोपण के लिए भेजी गई।
अंग प्रत्यारोपण में समय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, इसलिए ग्रीन कॉरिडोर का उपयोग किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य अस्पताल से प्रत्यारोपण केंद्र तक ट्रांसपोर्ट समय कम करना और अंग की कार्यक्षमता बनाए रखना होता है। इसी कारण शहर में अलग-अलग दिशा में दो कॉरिडोर बनाए गए और दोनों को निर्धारित समय पर सक्रिय किया गया।
इस पूरी प्रक्रिया ने एक बार फिर दिखाया कि ब्रेन डेड मरीजों के मामलों में समय पर मेडिकल सूचना, काउंसलिंग और बहु-संस्थागत समन्वय से अंगदान संभव हो पाता है। इंदौर में हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में संस्थागत तैयारी बढ़ी है, जिससे जरूरतमंद मरीजों तक अंग प्रत्यारोपण की सुविधा पहुंचाने में मदद मिल रही है।
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार इस प्रकरण का क्रमांक 95/02/2026 दर्ज किया गया है। संबंधित चिकित्सा संस्थानों ने कहा है कि प्रत्यारोपण प्रक्रियाएं मरीजों की चिकित्सकीय उपयुक्तता और नियमानुसार अनुमतियों के आधार पर आगे बढ़ेंगी।