इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर लेन पर बड़ा फैसला, 2935.15 करोड़ परियोजना अब जमीनी स्तर पर बनेगी

भोपाल में बुधवार शाम इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न गांवों से आए किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर लेन परियोजना पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह मार्ग अब एलिवेटेड संरचना की जगह जमीनी स्तर पर विकसित किया जाएगा, ताकि निर्माण मॉडल स्थानीय जरूरतों और किसान हितों के अनुरूप रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि इंदौर और उज्जैन का क्षेत्र भविष्य में महत्वपूर्ण मेट्रोपॉलिटन कॉरिडोर के रूप में विकसित होगा। इसी दृष्टि से सड़क परियोजना को केवल यातायात सुविधा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों की जमीन परियोजना से प्रभावित होगी, उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा देने के लिए शासन और प्रशासन दोनों स्तरों पर व्यवस्था की जा रही है।

“इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट किसानों के सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं, जमीनी स्तर पर बनाया जाएगा।” — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

बैठक में पहुंचे किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना के निर्माण स्वरूप में बदलाव और किसान हितों को प्राथमिकता देने के फैसले पर मुख्यमंत्री का आभार जताया। प्रतिनिधियों ने कहा कि संवाद के बाद निर्णय होने से जमीन अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया में भरोसा बढ़ेगा।

2935.15 करोड़ की परियोजना, 2 जिलों के 28 गांव सीधे जुड़ेंगे

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना लागू की जा रही है। योजना के तहत इंदौर और उज्जैन जिलों के कुल 28 गांवों को नई सड़क कनेक्टिविटी और जनसुविधाओं का लाभ मिलेगा। परियोजना को क्षेत्रीय विकास के अहम ढांचे के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें भविष्य की यातायात मांग को ध्यान में रखा गया है।

इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर पर दो प्रमुख स्थानों पर बड़े जंक्शन प्रस्तावित हैं। पहला जंक्शन वेस्टर्न रिंग रोड से जुड़ाव के लिए और दूसरा उज्जैन-बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर बनाया जाएगा। इन जंक्शनों का उद्देश्य लंबी दूरी और स्थानीय यातायात के प्रवाह को अलग-अलग चैनल में व्यवस्थित करना है, ताकि यात्रा समय घटे और जाम का दबाव कम हो।

पुराने मार्ग की दिक्कतों के समाधान पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के पुराने मार्ग से जानापाव क्षेत्र की आवाजाही भी लंबे समय से होती रही है। बीते वर्षों में मार्ग के संकुचित होने से दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रही। नई फोर लेन परियोजना के बाद इस दबाव को कम करने और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस सुधार होगा।

सरकार का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और नियंत्रित डिजाइन के साथ यातायात की गति और सुरक्षा दोनों को संतुलित रखा जाएगा। इसके लिए हर टोल प्लाजा पर आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। प्रशासनिक स्तर पर इस हिस्से को यातायात प्रबंधन का महत्वपूर्ण घटक माना गया है, ताकि व्यावसायिक, धार्मिक और स्थानीय यात्रा एक साथ सुचारु रह सके।

20 फरवरी के बाद अनुबंध प्रक्रिया आगे बढ़ी

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि किसानों से विचार-विमर्श के बाद परियोजना कार्यों को गति दी गई है। 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के बाद आगे की प्रक्रियाएं प्रचलन में हैं। यानी निर्माण से पहले की प्रशासनिक और तकनीकी चरणबद्ध कार्रवाई जारी है।

राज्य सरकार इस परियोजना को आगामी सिंहस्थ की जरूरतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मान रही है। उज्जैन में बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भारी संख्या में आने वाले यात्रियों के लिए सड़क क्षमता बढ़ाना जरूरी माना गया है। इस संदर्भ में इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर का उन्नयन सिर्फ नियमित यातायात नहीं, बल्कि विशेष अवसरों पर भी उपयोगी ढांचा तैयार करेगा।

सरकार के अनुसार यह परियोजना राज्य की सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसके जरिए दो बड़े शहरी क्षेत्रों के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और अधिक व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों के साथ संवाद, मुआवजा व्यवस्था और चरणबद्ध क्रियान्वयन पर जोर देते हुए सरकार ने संकेत दिया है कि परियोजना को सहमति आधारित मॉडल पर आगे बढ़ाया जाएगा।