इंदौर जल प्रदूषण मामला: 7 दिन बाद भी हालात गंभीर, 16 मरीज आईसीयू में और 65 अस्पताल में भर्ती

इंदौर के मध्य क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति का संकट सात दिन बाद भी पूरी तरह से टला नहीं है। स्नेहलता गंज और इसके आसपास के इलाकों में गंदा पानी पीने से बीमार हुए लोगों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। ताजा जानकारी के अनुसार, अभी भी 65 मरीज शहर के अलग-अलग अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं। इनमें से 16 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आईसीयू (Intensive Care Unit) में रखा गया है।

बीते एक हफ्ते से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन द्वारा किए जा रहे दावों के बावजूद मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नल से आने वाला पानी अभी भी पूरी तरह साफ नहीं है, जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों में उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण प्रमुखता से देखे जा रहे हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और जांच

नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं। पानी के नमूनों की जांच की जा रही है और लीकेज ढूंढने का काम भी जारी है। हालांकि, स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि समस्या का समाधान इतनी धीमी गति से क्यों हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पुरानी पाइपलाइनों के सीवेज लाइन के संपर्क में आने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जिसे ठीक करने के प्रयास युद्धस्तर पर जारी हैं।

आईसीयू में भर्ती मरीजों पर विशेष निगरानी

स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से आईसीयू में भर्ती 16 मरीजों की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। डॉक्टरों की विशेष टीमें इन मरीजों के इलाज में जुटी हैं। ज्यादातर मरीज डिहाइड्रेशन और पेट के गंभीर संक्रमण से जूझ रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पानी को उबालकर ही पिएं और किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

पुरानी घटनाओं से नहीं लिया सबक

इंदौर में दूषित पानी की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शहर के कई इलाकों में गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतें आती रही हैं। पिछली घटनाओं में भी प्रशासन ने जांच और सुधार के दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुरानी और जर्जर हो चुकी पाइपलाइनों को बदलने में लापरवाही बरती जा रही है।

स्वास्थ्य शिविर और दवा वितरण

प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्थाई शिविर भी लगाए गए हैं, जहां लोगों की जांच की जा रही है और जरूरी दवाइयां बांटी जा रही हैं। घर-घर जाकर सर्वे का काम भी किया जा रहा है ताकि बीमार लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज मुहैया कराया जा सके। क्लोरीन की गोलियां भी वितरित की जा रही हैं ताकि पानी को साफ किया जा सके।

फिलहाल, शहर के अस्पतालों में बेड की उपलब्धता पर भी नजर रखी जा रही है ताकि नए मरीजों के आने पर उन्हें कोई परेशानी न हो। प्रशासन का दावा है कि स्थिति जल्द ही नियंत्रण में होगी, लेकिन फिलहाल आंकड़ों को देखकर लगता है कि खतरा अभी टला नहीं है।