पश्चिमी बायपास को मिली रफ्तार: 1800 करोड़ की सड़क परियोजना, पुल निर्माण से ट्रैफिक को राहत

इंदौर के विकास को नई गति देने वाले वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। लगभग 1800 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

शहर के पश्चिमी हिस्से में यातायात को सुगम बनाने के लिए यह बायपास बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने इसके लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी, जिसके बाद से ही प्रभावित किसान लामबंद हो रहे थे। उनका कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की जा रही है।

मुआवजे और प्रक्रिया पर सवाल

हाई कोर्ट में दायर याचिका में मुख्य रूप से मुआवजे के निर्धारण और धारा 3ए की अधिसूचना को आधार बनाया गया है। किसानों का तर्क है कि उन्हें बाजार दर से उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है। कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं।

प्रोजेक्ट में हो सकती है देरी

वेस्टर्न बायपास का निर्माण इंदौर-उज्जैन रोड से शुरू होकर पीथमपुर होते हुए आगरा-बॉम्बे रोड तक प्रस्तावित है। इस विवाद के चलते टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। अधिकारी अब कोर्ट के रुख का इंतजार कर रहे हैं ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

गौरतलब है कि इंदौर में रिंग रोड और बायपास के आसपास की जमीनों के भाव आसमान छू रहे हैं, जिससे अधिग्रहण की लागत और विवाद दोनों बढ़ रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि वे जल्द ही कानूनी अड़चनों को दूर कर प्रोजेक्ट को पटरी पर लाएंगे।