Indore News : इंदौर में वन विभाग की टीम द्वारा रेस्क्यू किए गए एक घायल तेंदुए को जब इलाज के लिए इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (चिड़ियाघर) ले जाया गया, तो वहां के कर्मचारियों ने उसे रखने और उसका उपचार करने से मना कर दिया। इस घटना के बाद वन विभाग और चिड़ियाघर प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। अंततः टीम को तेंदुए को बिना इलाज के वापस रालामंडल ले जाना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, घायल तेंदुए को रेस्क्यू कर टीम चिड़ियाघर पहुंची थी। लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने विशेषज्ञ डॉक्टर के छुट्टी पर होने का हवाला देकर इलाज करने में असमर्थता जताई। चिड़ियाघर प्रबंधन के राकेश यादव ने बताया कि वाइल्ड एनिमल स्पेशलिस्ट डॉक्टर के परिवार में किसी का निधन हो जाने के कारण वह अवकाश पर हैं। इस वजह से यह स्थिति बनी।
वन विभाग के अधिकारी ने जताई नाराजगी
इस घटना पर रालामंडल के एसडीओ दिनेश कटारा ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि चिड़ियाघर प्रबंधन अक्सर घायल वन्यजीवों के इलाज में आनाकानी करता है।
“घायल या बीमार वन्यजीवों के इलाज और रखरखाव के लिए चिड़ियाघर अधिकृत है, लेकिन जब भी किसी वन्यजीव को वहां ले जाया जाता है, तो स्टाफ कोई न कोई बहाना बना देता है। इस बार भी यही हुआ।” — दिनेश कटारा, एसडीओ, रालामंडल
फिलहाल, घायल तेंदुए को वापस रालामंडल अभयारण्य ले जाया गया है, जहां कर्मचारी उस पर नजर रख रहे हैं। उसे आगे के इलाज के लिए महू के वेटरनरी अस्पताल ले जाने की तैयारी है।
क्यों जरूरी है रेस्क्यू सेंटर?
इंदौर वनमंडल में तेंदुओं की आबादी लगातार बढ़ रही है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। डीएफओ प्रदीप मिश्रा के अनुसार, शिकारियों के अलावा खेतों में जंगली सूअरों से बचाव के लिए लगाए गए बिजली के तार और खुले कुएं तेंदुओं के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं।
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए वन विभाग ने अब इंदौर में अपना खुद का रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डीएफओ मिश्रा ने बताया कि अब तक विभाग इलाज और देखभाल के लिए पूरी तरह चिड़ियाघर पर निर्भर था, जिससे अक्सर परेशानियां होती थीं।
5 साल में 67 तेंदुओं का रेस्क्यू
आंकड़े बताते हैं कि इंदौर वन विभाग की टीम ने पिछले पांच सालों में 67 तेंदुओं का सफल रेस्क्यू किया है। टीम को न सिर्फ इंदौर, बल्कि महू, चोरल, मानपुर और संभाग के अन्य जिलों में भी ऑपरेशन के लिए जाना पड़ता है। बढ़ते रेस्क्यू ऑपरेशन के कारण विभाग को विशेषज्ञ डॉक्टरों और पर्याप्त जगह की कमी महसूस हो रही है। प्रस्तावित नया रेस्क्यू सेंटर इन सभी समस्याओं का समाधान करेगा।