इंदौर भागीरथपुरा जलकांड : दूषित पानी से 15 मौतें, खौफजदा लोग अब टैंकर और बोरिंग पर निर्भर

Indore News : इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति ने एक गंभीर त्रासदी का रूप ले लिया है। यहां नर्मदा के दूषित पानी के सेवन से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन द्वारा लीकेज सुधारने का दावा किए जाने के 48 घंटे बाद भी स्थानीय निवासी सरकारी सप्लाई का पानी पीने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने और लगातार हो रही मौतों के बाद जनता का भरोसा नर्मदा के पानी से पूरी तरह उठ चुका है। लोग अब अपनी प्यास बुझाने के लिए बोरिंग, निजी टैंकरों, आरओ या बोतलबंद पानी पर निर्भर हो गए हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई: निगम कमिश्नर हटाए गए
इस गंभीर मामले में लापरवाही सामने आने पर मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा, एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री (Superintending Engineer) संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बावजूद, जमीन पर लोगों का गुस्सा और डर कम नहीं हुआ है।
गलियों में मातम और डर का साया
भागीरथपुरा की गलियों में सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। यहां महिलाएं उन परिवारों की चर्चा कर रही हैं, जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खो दिया। किसी ने अपनी मां को खोया, किसी ने पिता को, तो एक मां ने अपने पांच महीने के मासूम बच्चे को इस दूषित पानी की भेंट चढ़ा दिया।
स्थानीय निवासी माया बोरासी ने बताया कि उनकी गली में टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं, इसलिए वे मजबूरी में बोरिंग का पानी उबालकर इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘नर्मदा का पानी आ तो रहा है, लेकिन हम उसे भरने से डर रहे हैं।’ माया के बेटे हर्ष की तबीयत भी खराब है। हर्ष ने बताया कि 24-25 तारीख से उन्हें पेट दर्द की शिकायत थी, जो बाद में दूषित पानी का संक्रमण निकला।
टैंकर और बोरिंग बने सहारा
हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन अब दूसरी टंकियों से टैंकरों के जरिए पानी भिजवा रहा है। जिन संकरी गलियों में टैंकर नहीं जा सकते, वहां लोग बोरिंग का पानी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। डर इतना गहरा है कि बोरिंग के पानी को भी लोग कई बार छानकर और उबालकर पी रहे हैं। आर्थिक रूप से सक्षम लोग आरओ और बोतलबंद पानी खरीदकर काम चला रहे हैं।
पार्षद की अपील: पानी उबालकर ही पिएं
क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने स्वीकार किया कि जनता में भय का माहौल है। उन्होंने कहा:

“पिछले तीन दिनों से साफ पानी आ रहा है, लेकिन जब तक लोगों का विश्वास वापस नहीं लौटता, तब तक पानी उबालकर ही पीना चाहिए।” — कमल वाघेला, क्षेत्रीय पार्षद

पार्षद ने बताया कि क्षेत्र में नर्मदा लाइन बदलने का काम अभी केवल 60 प्रतिशत ही पूरा हुआ है, जबकि 40 प्रतिशत काम बाकी है। इसे पूरा होने में अभी और समय लगने की संभावना है।
फिलहाल, भागीरथपुरा के निवासी बीमारी और मौत के डर के साये में जी रहे हैं। बीमार लोग जल्द ठीक होने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन सरकारी सिस्टम पर उनका भरोसा लौटने में अभी वक्त लगेगा।