Indore News: देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान रखने वाले इंदौर में एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठे हैं। एमवाय अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई है। वीडियो में दो महिलाएं एक मरीज को पहिए वाले स्ट्रेचर पर लेकर ट्रैफिक के बीच सड़क पार करती दिखीं। इसके बाद अस्पताल की सफाई, गेट प्रबंधन, आपातकालीन व्यवस्था और निगरानी सिस्टम पर चर्चा तेज हो गई।
मामले को गंभीर मानते हुए डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने एमवाय अस्पताल सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव और भवन अधिकारी जितेंद्र रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। साथ ही अस्पताल परिसर में सुपरविजन और मेंटेनेंस का काम देखने वाली भारत विकास ग्रुप (BVG) पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। नोटिस में साफ-सफाई, भवन रखरखाव और निगरानी में लापरवाही पर जवाब मांगा गया है।
वायरल वीडियो ने उठाए कई प्रशासनिक सवाल
वायरल वीडियो में महिलाएं शासकीय डेंटल कॉलेज के सामने से मरीज को स्ट्रेचर पर धकेलते हुए एमवाय अस्पताल के मुख्य गेट तक पहुंचती हैं। वीडियो के मुताबिक मुख्य गेट बंद था, इसलिए उन्हें अगले गेट की ओर जाना पड़ा। इसी दृश्य ने नागरिकों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच कई सवाल खड़े किए। पहला सवाल यह कि अस्पताल का स्ट्रेचर सड़क पर कैसे पहुंचा। दूसरा सवाल यह कि मरीज को परिजनों को खुद क्यों ले जाना पड़ा।
यह मामला सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा। इसके बाद अस्पताल की आपातकालीन प्रतिक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और मरीज-हित से जुड़ी प्रक्रियाओं पर भी सवाल सामने आए। अस्पताल प्रबंधन के लिए यह प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन गया है।
डीन ने मांगी रिपोर्ट, CCTV फुटेज की जांच जारी
सूत्रो के मुताबिक डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने इस प्रकरण में सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव को तलब कर जांच की स्थिति पूछी। सूत्रों के अनुसार एमवाय अस्पताल और डेंटल कॉलेज दोनों संस्थानों के फुटेज की जांच की जा रही है। अब तक उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि दोनों महिलाएं मरीज को सड़क पर कब और किस दिशा से लेकर आईं।

प्रशासनिक अधिकारियों का फोकस अभी घटनाक्रम की टाइमलाइन बनाने पर है। वीडियो में दिख रहे मार्ग, अस्पताल के गेट संचालन और स्ट्रेचर मूवमेंट को लेकर अलग-अलग बिंदुओं की जांच की जा रही है।
निरीक्षण में चौथी-पांचवीं मंजिल पर फफूंद और गंदगी
वायरल वीडियो के बाद डीन ने मंगलवार को अस्पताल का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान चौथी और पांचवीं मंजिल के कुछ हिस्सों में दीवारों और टूटी टाइल्स पर फफूंद और गंदगी मिली। इस स्थिति पर डीन ने सुपरिटेंडेंट और संबंधित सुपरविजन टीम पर नाराजगी जताई।
डीन ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे पर पहले भी आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी थी। लगभग एक माह पहले भी उन्होंने इसी तरह की कमियों पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद कलेक्टर, कमिश्नर और मुख्यमंत्री का दौरा भी हुआ, लेकिन चिन्हित समस्याओं का समाधान पूरा नहीं हुआ।
नोटिस और जुर्माने के बाद जवाबदेही की परीक्षा
अस्पताल प्रशासन को जारी नोटिस में बुनियादी व्यवस्था, साफ-सफाई और भवन रखरखाव से जुड़े बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है। दूसरी ओर BVG पर लगाया गया 25 हजार रुपए का जुर्माना संकेत देता है कि आउटसोर्स एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है।
एमवाय अस्पताल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है। ऐसे में यहां की व्यवस्थागत कमियां स्थानीय ही नहीं, राज्यस्तरीय स्वास्थ्य प्रबंधन का भी मुद्दा बनती हैं। अभी जांच रिपोर्ट और नोटिस के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल प्रशासन का फोकस यह स्पष्ट करना है कि वायरल वीडियो में दिखा घटनाक्रम किन परिस्थितियों में हुआ और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए कौन से ठोस सुधार लागू किए जाएं।