Indore News: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इन दिनों सत्ताधारी दल के विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच गहराता गतिरोध चर्चा का विषय बना हुआ है। इंदौर के बीजेपी विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने खुले तौर पर नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया है कि शहर के अधिकारी उनकी सुन नहीं रहे हैं, जिससे न केवल विकास कार्य ठप हो रहे हैं बल्कि जनता के बीच सरकार की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
कोर कमेटी की बैठक में फूटा गुस्सा
यह मुद्दा गुरुवार शाम (26 मार्च) को इंदौर बीजेपी कार्यालय में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में प्रमुखता से उठा। बैठक में सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा समेत विधायक महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा और गोलू शुक्ला मौजूद थे। सभी नेताओं ने एक स्वर में जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के अड़ियल रवैये पर आपत्ति दर्ज कराई।
विधायकों के गंभीर आरोप: ‘निधि के काम तक अटके’
बैठक के दौरान विधायकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कई गंभीर उदाहरण दिए:
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महेंद्र हार्डिया: उन्होंने दो टूक कहा कि अधिकारी बिल्कुल नहीं सुन रहे हैं। यहाँ तक कि विधायक निधि से स्वीकृत जनहित के काम भी फाइलों में दबे हुए हैं।
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मधु वर्मा: उन्होंने विकास कार्यों के प्रभावित होने पर चिंता जताई। वर्मा ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी चालानी कार्रवाई जैसे छोटे मामलों में भी जनप्रतिनिधियों के सुझावों को अनसुना कर रहे हैं।
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गोलू शुक्ला: विधायक शुक्ला ने भी कहा कि प्रशासन में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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सुमित मिश्रा (नगराध्यक्ष): उन्होंने मुख्यमंत्री के आगामी कार्यक्रम के नियोजन पर सवाल उठाए। मिश्रा का आरोप है कि अधिकारियों ने 29 मार्च के कार्यक्रम का स्थान (दशहरा मैदान) और रूपरेखा खुद तय कर ली, जिसमें संगठन या जनप्रतिनिधियों से कोई चर्चा नहीं की गई।