रंगपंचमी से पहले इंदौर का राजवाड़ा तिरपाल से कवर, ऐतिहासिक धरोहर को रंगों से बचाने की खास तैयारी

विपिन नीमा 

इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा को रंगपंचमी के रंगों से सुरक्षित रखने के लिए नगर निगम ने एक खास व्यवस्था की है। सदियों पुरानी इस धरोहर को चारों तरफ से पीले रंग की तिरपाल से पूरी तरह कवर कर दिया गया है, ताकि रंग, पानी और कीचड़ का असर इस इमारत पर न पड़े। लगभग 200 साल से ज्यादा पुराने इस ऐतिहासिक भवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। निगम ने करीब 918 फीट लंबी और 232 फीट चौड़ी इस भव्य इमारत को पूरी तरह ढककर सुरक्षित रखने की तैयारी की है।

रंगपंचमी पर राजवाड़ा बनता है शहर का सबसे बड़ा आयोजन स्थल

इंदौर में होली से ज्यादा उत्साह रंगपंचमी को लेकर देखने को मिलता है। इस दिन पूरा शहर राजवाड़ा पर इकट्ठा होता है और यहां रंगारंग गेरों का भव्य संगम होता है। शहर के अलग-अलग इलाकों से निकलने वाली गेरें राजवाड़ा पहुंचती हैं, जिससे यह जगह रंगों से सराबोर हो जाती है। इस साल 8 मार्च को भी शहर के विभिन्न हिस्सों से गेरें निकलेंगी और लाखों लोग इस रंगीन आयोजन का हिस्सा बनेंगे।

अलग-अलग गेरों का होगा भव्य संगम

रंगपंचमी के अवसर पर राजवाड़ा पर कई प्रमुख गेरों का मिलन होगा। इनमें टोरी कॉर्नर गेर, मॉरल क्लब गेर, संगम कॉर्नर गेर और राधा-कृष्ण फाग यात्रा जैसी प्रसिद्ध गेरें शामिल हैं। इन गेरों के साथ हजारों लोग नाचते-गाते और रंग उड़ाते हुए राजवाड़ा पहुंचते हैं। अनुमान है कि इस दौरान करीब 3 से 4 लाख लोग यहां मौजूद रहेंगे और पूरा क्षेत्र रंगों और उत्साह से भर जाएगा।

ऊंची रंग मिसाइलों से उड़ते हैं आसमान में रंग

रंगपंचमी के दौरान गेरों में 100 से 150 फीट तक ऊंचाई तक रंग उड़ाने वाली मशीनों और मिसाइलों का उपयोग किया जाता है। इनसे निकलने वाला रंग दूर तक फैलता है और पूरे इलाके को रंगीन बना देता है। इसी वजह से राजवाड़ा की सात मंजिला ऐतिहासिक इमारत को नुकसान से बचाने के लिए नगर निगम ने इसे पूरी तरह तिरपाल से कवर कर दिया है, ताकि दीवारें गंदी न हों और किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

पर्यटकों को बाहर से भी नहीं दिख रही इमारत

तिरपाल से पूरी तरह ढक दिए जाने के कारण फिलहाल राजवाड़ा की दीवारें बाहर से दिखाई नहीं दे रही हैं। यहां आने वाले पर्यटक भी इस ऐतिहासिक इमारत का बाहरी स्वरूप ठीक से नहीं देख पा रहे हैं। हालांकि यह व्यवस्था सिर्फ इमारत की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि रंगपंचमी के दौरान लाखों लोगों की भीड़ के बीच इस धरोहर को कोई नुकसान न पहुंचे।

रंगपंचमी पर राजवाड़ा की अलग ही होती है रौनक

रंगपंचमी के दिन राजवाड़ा की रौनक देखने लायक होती है। चारों ओर रंगों का धुंआ और उत्सव का माहौल बना रहता है। हजारों लोग नाचते-गाते गेरों के साथ यहां पहुंचते हैं और पूरा क्षेत्र रंगों से भर जाता है। अनुमान है कि इस दौरान 5 से 6 लाख लोग इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। यही वजह है कि इंदौर की रंगपंचमी देशभर में प्रसिद्ध है।

हाल ही में हुआ है राजवाड़ा का जीर्णोद्धार

कुछ साल पहले ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से राजवाड़ा का पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण किया गया था। उस समय भी सुरक्षा के लिहाज से पूरी इमारत को लोहे के स्ट्रक्चर से कवर किया गया था। अब रंगपंचमी के मौके पर फिर से इसे सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल से ढका गया है।

राजवाड़ा का गौरवशाली इतिहास

राजवाड़ा इंदौर की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। यह कभी होलकर राजवंश का निवास स्थान हुआ करता था। इसका निर्माण 1747 में मल्हार राव होलकर ने शुरू करवाया था और करीब दो दशक बाद यह इमारत पूरी तरह तैयार हुई। आज यह इमारत इंदौर शहर की पहचान बन चुकी है और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

राजवाड़ा से जुड़ी खास जानकारी:

  • ऊंचाई: लगभग 29 मीटर
  • चौड़ाई: करीब 232 फीट
  • निर्माण शुरू: 1747
  • निर्माण पूरा: 1766
  • उम्र: लगभग 278 वर्ष

इंदौर की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक राजवाड़ा हर साल रंगपंचमी के मौके पर रंगों और उत्सव से सराबोर हो जाता है, लेकिन इस बार इसकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि इतिहास की इस धरोहर पर कोई दाग न लगे।