सराफा बाज़ार इंदौर की नाइट चौपाटी पर बड़ा सवाल: बिना लाइसेंस चल रहीं दुकानें, नाइट्रोजन पान की बिक्री पर उठे ऐतराज

इंदौर के प्रसिद्ध सराफा बाज़ार में रात के समय लगने वाली चाट चौपाटी को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। नगर निगम ने लिखित जवाब में स्वीकार किया है कि यहां संचालित किसी भी अस्थायी दुकान को न तो ट्रेड लाइसेंस जारी किया गया है और न ही फूड लाइसेंस। इस स्वीकारोक्ति के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है और वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रहवासी संघ द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी ने इस स्थिति को उजागर किया। संघ की ओर से अधिवक्ता पंकज प्रजापति ने निगम के मार्केट विभाग से पूछा था कि जिन दुकानों को लाइसेंस दिया गया है, उनकी प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं। 9 फरवरी को मिले जवाब में सहायक लोकसूचना अधिकारी ने स्पष्ट लिखा कि अस्थायी दुकानों के लिए निगम किसी प्रकार का ट्रेड लाइसेंस जारी नहीं करता। इससे साफ हो गया कि चौपाटी पर लग रही दुकानें वैधानिक अनुमति के बिना संचालित हो रही हैं।

नगर निगम की इस लिखित स्वीकारोक्ति के बाद एक और प्रश्न उठ खड़ा हुआ है। कुछ माह पूर्व निगम ने 69 दुकानों की सूची जारी कर यह दावा किया था कि केवल इन्हीं दुकानों को अनुमति है। अब जब लाइसेंस ही जारी नहीं किए गए, तो यह सूची किस आधार पर बनाई गई और दुकानों को संचालन की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत दी गई—यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है।

इस बीच चौपाटी पर दुकानों की संख्या 80 के पार पहुंच चुकी है। रहवासी संघ का आरोप है कि पहले परंपरागत दुकानों की बात कही गई थी, लेकिन अब नए-नए स्टॉल भी जुड़ते जा रहे हैं। गैस भट्टों और चूल्हों के उपयोग पर भी कोई ठोस नियंत्रण नजर नहीं आता। दो वर्ष पूर्व शकर बाजार क्षेत्र में आग लगने की घटना का हवाला देते हुए रहवासी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं।

संघ की प्रतिनिधि शोभा जोशी के अनुसार, रात के समय इतनी भीड़ और दुकानों के कारण आपात स्थिति में एंबुलेंस तक का पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। परंपरा और धरोहर के नाम पर ऐसे प्रयोग भी हो रहे हैं, जो सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते, जैसे नाइट्रोजन गैस वाले पान की बिक्री। रहवासियों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

अब रहवासी संघ ने संकेत दिए हैं कि वे इस मामले में कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। नगर निगम के जवाब ने जहां प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाया है, वहीं चौपाटी की व्यवस्थाओं और सुरक्षा मानकों पर व्यापक बहस छेड़ दी है।