देश की इकोनॉमी को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। आर्थिक विकास की रफ्तार तय करने वाले सबसे अहम फैक्टर, यानी औद्योगिक उत्पादन (Industrial Production) में तेज़ उछाल दर्ज किया गया है। दिसंबर महीने के आंकड़े बताते हैं कि इंडस्ट्री सेक्टर ने मजबूत वापसी की है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे लेकिन मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।
दो साल के उच्च स्तर पर पहुंचा इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर करीब 8 फीसदी के आसपास पहुंच गई, जो बीते दो वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। एक साल पहले इसी महीने यह आंकड़ा 4 फीसदी से भी नीचे था। इसका सीधा मतलब है कि एक साल के भीतर इंडस्ट्रियल एक्टिविटी में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है और फैक्ट्रियों की रफ्तार तेज हुई है।
आईआईपी में लगातार मजबूती का संकेत
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार पर मापी जाने वाली यह ग्रोथ दिसंबर 2025 में 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। नवंबर 2025 में भी इंडस्ट्री सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया था। पहले नवंबर के लिए 6.7 प्रतिशत की अस्थायी ग्रोथ बताई गई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 7.2 प्रतिशत कर दिया गया। यह दिखाता है कि औद्योगिक गतिविधियों में सुधार अनुमान से भी बेहतर रहा है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ की रीढ़
इस मजबूत प्रदर्शन में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की भूमिका सबसे अहम रही। दिसंबर 2025 में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह ग्रोथ सिर्फ 3.7 प्रतिशत थी। इससे साफ है कि फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ा है और मांग में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
माइनिंग और पावर सेक्टर ने भी दिया सहारा
औद्योगिक उत्पादन को मजबूती देने में खनन और बिजली सेक्टर का योगदान भी अहम रहा। दिसंबर 2025 में माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ 6.8 प्रतिशत रही, जो पिछले साल इसी महीने 2.7 प्रतिशत थी। वहीं बिजली उत्पादन में 6.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो लगभग पिछले साल के स्तर के आसपास बनी रही। इससे यह संकेत मिलता है कि बुनियादी सेक्टर्स में स्थिरता बनी हुई है।
पूरे वित्त वर्ष की तस्वीर अभी भी सतर्कता मांगती है
हालांकि दिसंबर के आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो तस्वीर थोड़ी संतुलित नजर आती है। वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल से दिसंबर अवधि के दौरान औद्योगिक उत्पादन की औसत वृद्धि दर 3.9 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 4.1 प्रतिशत थी। यानी सालाना स्तर पर अभी भी पूरी तरह तेज़ी नहीं आई है।
आर्थिक रिकवरी की ओर बढ़ता भारत
कुल मिलाकर दिसंबर के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था रिकवरी के रास्ते पर है। मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और पावर जैसे प्रमुख सेक्टर्स की मजबूती आने वाले महीनों में ग्रोथ को और सहारा दे सकती है। यदि यह ट्रेंड बना रहता है, तो आने वाले समय में रोजगार, निवेश और मांग में भी और सुधार देखने को मिल सकता है।