इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक, इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH) में इलाज कराने आ रहे मरीज गंभीर संक्रमण के खतरे का सामना कर रहे हैं। अस्पताल के कई वार्डों की हालत बेहद खराब है, जहां दीवारों पर फंगस (काई), शौचालयों से लगातार सीलन और गंदगी ने मरीजों की सेहत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अस्पताल के नए भवन सहित कई वार्डों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मरीजों के बिस्तरों के ठीक पीछे की दीवारों पर नमी और फंगस साफ देखी जा सकती है। यह समस्या न्यूरोसर्जरी वार्ड से लेकर छठी मंजिल पर स्थित अन्य वार्डों तक फैली हुई है। इससे न केवल मरीज बल्कि उनके परिजन भी परेशान हैं, जो इन अस्वच्छ परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।
शौचालयों की बदहाली बढ़ा रही मुसीबत
वार्डों में बने शौचालयों की स्थिति और भी बदतर है। ज्यादातर टॉयलेट की सीटें टूटी हुई हैं, यूरिनल गंदे पड़े हैं और नलों से पानी टपकता रहता है। कई बाथरूमों में पानी की निकासी व्यवस्था भी ठप है, जिससे गंदा पानी जमा रहता है और दुर्गंध फैलती है। इसी सीलन का पानी रिसकर दीवारों के रास्ते मरीजों के बिस्तरों तक पहुंच रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
मरीजों की सेहत से खिलवाड़
चिकित्सकों के अनुसार, फंगस और नमी वाले वातावरण में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे मरीजों को सेकेंडरी इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। सर्जरी के बाद भर्ती हुए मरीज, नवजात शिशु या कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है। डॉक्टरों की मेहनत और इलाज पर होने वाला खर्च इस अव्यवस्था के कारण व्यर्थ साबित हो रहा है।
कौन है इस लापरवाही का जिम्मेदार?
जब इस मामले पर अस्पताल प्रबंधन से बात की गई तो उन्होंने मरम्मत में हो रही देरी का ठीकरा लोक निर्माण विभाग (PWD) पर फोड़ दिया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. पीएस ठाकुर ने स्वीकार किया कि समस्या मौजूद है, लेकिन उन्होंने कहा कि बड़े मरम्मत कार्यों की जिम्मेदारी PWD की है।
“अस्पताल में मरम्मत का काम लगातार चलता रहता है। कई वार्डों में काम चल भी रहा है। जिन वार्डों में सीपेज की समस्या है, उनकी सूची बनाकर लोक निर्माण विभाग को दे दी गई है। बजट मिलते ही वहां भी काम शुरू करवा दिया जाएगा।” — डॉ. पीएस ठाकुर, अधीक्षक, MYH
एक तरफ अस्पताल प्रबंधन बजट और PWD की मंजूरी का इंतजार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों मरीज हर दिन संक्रमण के साये में इलाज कराने को मजबूर हैं। यह स्थिति इंदौर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है और तत्काल कार्रवाई की मांग करती है ताकि मरीजों का जीवन सुरक्षित रह सके।