हवाई सफर पर महंगाई की मार: इंडिगो और एअर इंडिया के बाद अब अकासा एयर ने भी बढ़ाया किराया

नई दिल्ली | अगर आप आने वाले दिनों में हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अपनी जेब थोड़ी और ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। देश की तेजी से उभरती एयरलाइन कंपनी अकासा एयर (Akasa Air) ने भी अब इंडिगो और एअर इंडिया की राह पर चलते हुए अपने टिकटों के दाम बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह 15 मार्च की आधी रात से अपनी सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) लागू करेगी।

कल से लागू होंगी नई दरें

अकासा एयर के मुताबिक, 15 मार्च को रात 12:01 बजे के बाद बुक किए जाने वाले टिकटों पर यात्रियों को 199 रुपये से लेकर 1,300 रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि जिन यात्रियों ने 15 मार्च की समय सीमा से पहले अपनी टिकटें बुक कर ली हैं, उन पर यह बढ़ा हुआ बोझ नहीं पड़ेगा। यह सरचार्ज ‘पर सेक्टर’ यानी एक तरफ की यात्रा के हिसाब से लगेगा और इसकी राशि उड़ान की दूरी और समय (Duration) पर आधारित होगी।

युद्ध और ग्लोबल टेंशन ने बिगाड़ा खेल

हवाई किरायों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भारी तनाव है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिसका सीधा असर जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों पर पड़ा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस के बजट को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है।

अन्य एयरलाइंस का भी यही हाल

अकासा एयर से पहले भारत की दो दिग्गज एयरलाइंस पहले ही अपने दाम बढ़ा चुकी हैं:

  1. इंडिगो (IndiGo): देश की सबसे बड़ी एयरलाइन ने 14 मार्च की रात से ही ₹425 से लेकर ₹2300 तक का सरचार्ज लागू कर दिया है।

  2. एअर इंडिया (Air India): टाटा समूह के स्वामित्व वाली इस कंपनी ने 12 मार्च से घरेलू उड़ानों पर ₹399 का सरचार्ज लगाया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में 15% तक का इजाफा किया है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? 3 मुख्य कारण

  • कच्चे तेल की कीमतें: ईरान-इजरायल युद्ध और होर्मुज रूट के प्रभावित होने से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो हाल ही में 120 डॉलर तक जा पहुंची थीं।

  • जेट फ्यूल की आसमान छूती दरें: युद्ध से पहले जेट फ्यूल 85-90 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब बढ़कर 150 से 200 डॉलर के बीच पहुंच गया है। एयरलाइंस के कुल खर्च (Operating Cost) में अकेले ईंधन की हिस्सेदारी 30% से 40% होती है।

  • लंबे और घुमावदार रूट: सुरक्षा कारणों से एयरलाइंस अब युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर से उड़ान भरने के बजाय लंबे रास्तों का चुनाव कर रही हैं। रास्ता लंबा होने का मतलब है—ज्यादा ईंधन की खपत और बढ़ा हुआ मेंटेनेंस खर्च।

स्पाइसजेट ने सरकार से लगाई गुहार

जहाँ एक तरफ कंपनियां किराया बढ़ा रही हैं, वहीं स्पाइसजेट के फाउंडर अजय सिंह ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर तेल की कीमत पूरी एविएशन इंडस्ट्री के लिए ‘खतरे की घंटी’ है। उन्होंने सरकार से जेट फ्यूल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और वैट (VAT) में कटौती करने की अपील की है ताकि आम आदमी पर पड़ने वाले इस बोझ को कम किया जा सके।

वैश्विक स्तर पर भी संकट

यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भी अपने फाइनेंशियल आउटलुक को वापस ले लिया है और यात्रियों पर अतिरिक्त खर्च डालने की मजबूरी जाहिर की है। मिडिल ईस्ट तनाव के कारण अब तक दुनिया भर में 40,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों पर बुरा असर पड़ा है।