ईरान-अमेरिका युद्ध: अमेरिकी संसद में हमला रोकने का प्रस्ताव गिरा, हिंद महासागर में ईरानी वॉरशिप डूबे

वाशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में जारी युद्ध अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। अमेरिकी सीनेट ने बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान के खिलाफ सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाले एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। 47 के मुकाबले 53 वोटों से प्रस्ताव गिरने का सीधा अर्थ है कि अब अमेरिकी राष्ट्रपति के पास ईरान पर हमले जारी रखने की खुली छूट है।
हिंद महासागर में बड़ी सैन्य कार्रवाई: ‘IRIS देना’ तबाह
इस युद्ध की आंच अब खाड़ी देशों से निकलकर हिंद महासागर तक पहुंच गई है। बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई में अमेरिकी नौसेना ने ईरानी युद्धपोत IRIS देना को श्रीलंका के तट के पास डुबो दिया।
  • कैसे हुआ हमला: अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने सटीक टॉरपीडो दागकर ईरानी जहाज को निशाना बनाया।
  • भारत से लौट रहा था जहाज: यह युद्धपोत पिछले महीने भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित ‘2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ में शामिल होकर वापस ईरान लौट रहा था।
  • हताहतों की संख्या: जहाज पर लगभग 180 नौसैनिक सवार थे, जिनमें से 87 की मौत की पुष्टि हो चुकी है। श्रीलंका की नौसेना ने तत्परता दिखाते हुए 32 घायल नौसैनिकों को बचाया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
युद्ध के आंकड़े: 5000 मिसाइलें और भारी तबाही
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह दिनों में अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर कहर बरपाया है:
  1. हवाई हमले: ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर अब तक 5000 से ज्यादा बम और मिसाइलें गिराई जा चुकी हैं।
  2. नौसैनिक क्षति: ईरान की नौसेना को भारी चोट पहुंची है; अब तक उसके 20 वॉरशिप डुबोए जा चुके हैं।
  3. मानवीय क्षति: इन हमलों में अब तक 1000 से अधिक लोगों की जान जाने की खबर है।
ईरान की ‘न्यूक्लियर’ चेतावनी और जवाबी हमला
ईरान ने इस चौतरफा घेराबंदी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजराइल ने ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) की कोशिश की, तो वह इजराइल के डिमोना न्यूक्लियर सेंटर को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा। इसके अलावा, ईरान ने मिडिल ईस्ट के 9 देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव: UAE में स्कूल बंद, अमेरिका में खुफिया अलर्ट
युद्ध के कारण पड़ोसी देशों में भी अफरा-तफरी का माहौल है:
  • UAE का फैसला: संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने एहतियात के तौर पर स्कूलों और विश्वविद्यालयों में बसंत की छुट्टियां समय से पहले घोषित कर दी हैं। अब शिक्षण संस्थान 23 मार्च तक बंद रहेंगे।
  • खुफिया तैनाती: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पेंटागन से अतिरिक्त खुफिया अधिकारियों की मांग की है। फ्लोरिडा मुख्यालय में अगले 100 दिनों के लिए भारी संख्या में विश्लेषकों को तैनात किया जा रहा है ताकि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन्स की सटीक निगरानी की जा सके।
अमेरिकी राजनीति में दरार
युद्ध को लेकर अमेरिकी संसद में भी मतभेद स्पष्ट दिखे। रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर रैंड पॉल ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर युद्ध रोकने के पक्ष में वोट दिया, वहीं डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन ने रिपब्लिकन का साथ देते हुए युद्ध जारी रखने का समर्थन किया। फिलहाल, राजनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर ट्रंप प्रशासन ईरान को झुकने पर मजबूर करने की रणनीति पर कायम है।