मध्य पूर्व में तनाव शनिवार को तेजी से बढ़ गया, जब भारतीय समयानुसार सुबह इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों पर सैन्य हमला किया। हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी और इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब तक करीब 400 मिसाइलें दाग चुका है।
घटनाक्रम कुछ ही घंटों में क्षेत्रीय दायरे में फैल गया। इजराइल के साथ-साथ कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की सूचना है। इसी क्रम में संयुक्त अरब अमीरात के शहर दुबई और अबू धाबी पर भी मिसाइल हमलों की खबरें सामने आईं।
UAE के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश पर हुए हमले को एयर डिफेंस सिस्टम ने बड़े स्तर पर नाकाम किया, लेकिन मिसाइल के टुकड़े गिरने से अबू धाबी में एक व्यक्ति की मौत हो गई। मंत्रालय ने हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और कहा कि जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखा गया है।
इजराइल का अभियान और लक्षित ठिकाने
इजराइल ने अपने इस सैन्य अभियान को ‘लियोन्स रोर’ नाम दिया है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस कार्रवाई में अमेरिका भी शामिल रहा। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार इसे अमेरिका और इजराइल का संयुक्त अभियान बताया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने ईरान के खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय और परमाणु ऊर्जा संगठन को निशाना बनाया। हमलों के बाद खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने की जानकारी भी दी गई है।
ईरानी जवाबी हमले और क्षेत्रीय असर
ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों का प्राथमिक लक्ष्य इजराइली क्षेत्र बताया गया, लेकिन इसके समानांतर खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति भी हमले के दायरे में आई। इससे संकट केवल इजराइल-ईरान संघर्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिकी हितों और खाड़ी देशों की सुरक्षा पर भी सीधा दबाव बना।
जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसके हवाई क्षेत्र के ऊपर दो बैलिस्टिक मिसाइलें देखी गईं। सेना के मुताबिक, एयर डिफेंस सिस्टम ने दोनों मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि ये मिसाइलें किस दिशा से दागी गई थीं।
क्षेत्र के कई देशों में एयर डिफेंस अलर्ट बढ़ाए गए हैं और वायुक्षेत्र सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मिसाइलों के टुकड़े गिरने और अनियंत्रित ट्रैजेक्टरी की आशंका के कारण गैर-युद्धक्षेत्र वाले शहरों पर भी खतरा बढ़ा है, जैसा अबू धाबी की घटना में सामने आया।
अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता के बीच बढ़ा संकट
यह सैन्य टकराव ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी। मौजूदा घटनाक्रम ने कूटनीतिक प्रक्रिया पर दबाव बढ़ा दिया है और सुरक्षा प्राथमिकताओं को अचानक सैन्य मोड़ पर ला खड़ा किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही ईरान को कड़ी चेतावनी दे चुके थे। उनका कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिका और उसके नागरिकों को संभावित खतरे से बचाना है, साथ ही ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना है।
फिलहाल क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और अलर्ट स्थिति जारी हैं। अलग-अलग देशों की आधिकारिक एजेंसियां हमलों, जवाबी कार्रवाई और हताहतों के आंकड़ों को अद्यतन कर रही हैं। मौजूदा परिदृश्य में स्थिति तेजी से बदल रही है और आने वाले घंटों में नई सैन्य व कूटनीतिक घोषणाएं निर्णायक हो सकती हैं।