जबलपुर के सरकारी महकमे में एक बार फिर प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा आउटसोर्स कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। शहर के प्रमुख सरकारी संस्थानों में सेवाएं दे रहे सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, पुरानी एजेंसी का टेंडर खत्म हो चुका है, लेकिन नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इस लेटलतीफी के कारण कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
विभागों में सुरक्षा, सफाई और अन्य तकनीकी कार्य संभालने वाले ये कर्मचारी अब असमंजस की स्थिति में हैं। उन्हें डर है कि दो एजेंसियों के बीच फंसे पेंच के कारण उनका वेतन अटक सकता है या उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
क्यों खड़ी हुई यह समस्या?
जानकारी के मुताबिक, आउटसोर्स एजेंसी का अनुबंध समाप्त होने की तारीख पहले से तय थी। इसके बावजूद समय रहते नई टेंडर प्रक्रिया को अंजाम नहीं दिया गया। बताया जा रहा है कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल और विभागीय औपचारिकताओं में हुई देरी के कारण यह नौबत आई है। अब स्थिति यह है कि पुरानी एजेंसी का काम बंद हो चुका है और नई एजेंसी के पास अभी वर्क ऑर्डर नहीं है।
इस तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ी के चलते कर्मचारियों की हाजिरी और वेतन भुगतान को लेकर संशय बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन लिखित में कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है।
कर्मचारियों में भारी आक्रोश
इस अनिश्चितता के चलते आउटसोर्स कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे कम वेतन में भी पूरी निष्ठा से काम करते हैं, लेकिन हर बार टेंडर बदलने के समय उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। कई कर्मचारियों ने बताया कि अगर उन्हें सेवा विस्तार नहीं मिला या वेतन रोका गया, तो उनके घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।
“हमारा अनुबंध खत्म हो गया है और नई एजेंसी का कुछ पता नहीं है। अधिकारी कह रहे हैं काम करते रहो, लेकिन अगर कल को वेतन नहीं मिला तो जिम्मेदार कौन होगा?” — एक प्रभावित कर्मचारी
अधिकारियों का तर्क
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं। उनका तर्क है कि जब तक नई एजेंसी कार्यभार नहीं संभालती, तब तक पुरानी व्यवस्था के तहत या सेवा विस्तार देकर काम चलाया जाएगा। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया कब तक पूरी होगी, इस पर कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जबलपुर में आउटसोर्स कर्मचारियों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। इससे पहले भी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल जैसे संस्थानों में टेंडर विवाद के चलते कर्मचारियों को हड़ताल का सहारा लेना पड़ा था। फिलहाल, सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।