Chandigarh News: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है।
जस्टिस की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस हत्याकांड की साजिश रचने में राम रहीम के खिलाफ पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं मिले हैं। हालाकि, कोर्ट ने इस मामले के तीन अन्य दोषियों—कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल—की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
फैसले का मुख्य आधार: साक्ष्यों का अभाव
हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा 2019 में दी गई उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष राम रहीम की संलिप्तता को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
बचाव पक्ष के वकील बसंत राय ने कोर्ट में दलील दी कि जांच के दौरान साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। वकील ने तर्क दिया कि जिस गोली से पत्रकार की हत्या हुई, वह ‘सॉफ्ट लेड’ की बनी थी और 23 साल बीत जाने के कारण उस पर लगे महत्वपूर्ण निशान अब दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने इस बात पर भी गौर किया कि फोरेंसिक लैब (FSL) की जांच प्रक्रिया और सीलबंद डिब्बों पर हस्ताक्षरों को लेकर कई तकनीकी विसंगतियां थीं।
क्या था पूरा मामला? (2002 की वो खौफनाक रात)
रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा के एक निर्भीक पत्रकार थे, जिन्होंने वर्ष 2000 में वकालत छोड़कर अपना अखबार शुरू किया था। विवाद की जड़ें मई 2002 में जमीं, जब उन्होंने अपने अखबार में एक गुमनाम पत्र प्रकाशित किया। इस पत्र में डेरे के भीतर साध्वियों के साथ हो रहे यौन शोषण का खुलासा किया गया था।
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लगातार धमकियां: पत्र छपने के बाद छत्रपति को लगातार जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं, लेकिन उन्होंने झुकने से इनकार कर दिया।
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हमला: 19 अक्टूबर 2002 की रात को जब वे अपने घर के बाहर थे, उन पर हमलावरों ने 5 गोलियां दागीं।
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शहादत: गंभीर रूप से घायल होने के बाद 21 अक्टूबर को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई, जिसने राम रहीम को इस हत्या की साजिश का मुख्य सूत्रधार माना था।
अन्य दोषियों पर कोर्ट का कड़ा रुख
राम रहीम को राहत मिलने के बावजूद, हाईकोर्ट ने अन्य तीन आरोपियों के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई। अदालत ने पाया कि कुलदीप, निर्मल और कृष्ण लाल के खिलाफ उपलब्ध गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्य उनकी प्रत्यक्ष भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं। इसी आधार पर उनकी उम्रकैद की सजा को जारी रखने का आदेश दिया गया।
राम रहीम की जेल यात्रा और कानूनी स्थिति
भले ही इस मामले में राम रहीम को बरी कर दिया गया हो, लेकिन वह अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएगा। इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
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साध्वी यौन शोषण मामला: राम रहीम वर्तमान में दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में 10 साल की सजा काट रहा है।
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रणजीत सिंह हत्याकांड: पूर्व में डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड में भी हाईकोर्ट ने उसे बरी किया था, लेकिन CBI ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जो अभी लंबित है।
पीड़ित परिवार का अगला कदम: “सुप्रीम कोर्ट जाएंगे”
हाईकोर्ट के इस फैसले पर रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने गहरी निराशा व्यक्त की है। अंशुल ने कहा:
“CBI ने इस मामले में बहुत मेहनत की और सभी पुख्ता सबूत पेश किए थे। राम रहीम जैसे व्यक्ति का इस तरह बरी होना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। हम इस फैसले को स्वीकार नहीं करते और न्याय के लिए अब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाएंगे।”