ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव बताया गया है। जब किसी जातक की कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी सातों ग्रह आ जाते हैं, तो इस स्थिति को ‘काल सर्प दोष’ कहा जाता है। इसे ज्योतिष में एक अत्यंत अशुभ योग माना गया है, जो जातक के जीवन में कई तरह की उथल-पुथल मचा सकता है।
इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति को न केवल शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र में इस दोष के निवारण के लिए कई प्रभावी उपाय भी बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
काल सर्प दोष के लक्षण और प्रभाव
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में यह दोष बनता है, तो उसे अक्सर कड़े परिश्रम के बावजूद सफलता नहीं मिल पाती। धन संबंधी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं और कर्ज का बोझ बढ़ता जाता है। इसके अलावा, मानसिक तनाव, नींद न आना और बुरे सपने आना भी इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं। कई बार यह दोष वैवाहिक जीवन में भी कलह का कारण बनता है।
राहत के लिए प्रमुख ज्योतिषीय उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, काल सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की आराधना सबसे उत्तम मानी गई है।
शिवलिंग का जलाभिषेक: नियमित रूप से शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें। विशेष रूप से सोमवार के दिन ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए रुद्राभिषेक करने से इस दोष का प्रभाव तेजी से कम होता है।
नाग पंचमी पर पूजा: नाग पंचमी का दिन काल सर्प दोष की शांति के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही बहते जल में नाग-नागिन का जोड़ा प्रवाहित करना भी लाभकारी माना गया है।
राहु-केतु शांति के उपाय
चूंकि यह दोष मुख्य रूप से राहु और केतु की स्थिति के कारण बनता है, इसलिए इन ग्रहों की शांति के उपाय करना अनिवार्य है।
महामृत्युंजय मंत्र: प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करना चाहिए। यह मंत्र न केवल भय को दूर करता है, बल्कि ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी नष्ट करता है।
दान-पुण्य: राहु-केतु से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। काला तिल, उड़द की दाल, कंबल या लोहे की वस्तुओं का दान शनिवार या बुधवार को करना शुभ फलदायी होता है।
मोर पंख: घर में मोर पंख रखना भी वास्तु और ज्योतिष दोनों दृष्टियों से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने मुकुट में मोर पंख धारण करते थे, जो काल सर्प दोष के प्रभाव को क्षीण करता है।
(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय जानकारियों पर आधारित है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।)