Bengaluru News: डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में कर्नाटक सरकार ने एक अत्यंत साहसी और बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार (6 मार्च, 2026) को राज्य का बजट पेश करते हुए घोषणा की कि कर्नाटक में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मोबाइल की बढ़ती लत और सोशल मीडिया के प्रतिकूल प्रभाव बच्चों के विकास में बाधा बन रहे हैं। सरकार का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम न केवल बच्चों की शिक्षा और एकाग्रता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उनकी शारीरिक फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

इस निर्णय की नींव पिछले महीने बेंगलुरु में आयोजित ‘कुलपति सम्मेलन’ में रखी गई थी, जहाँ विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता जताई थी।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग और भारत की पहल
इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि:
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ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं।
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फिनलैंड, फ्रांस और स्पेन जैसे यूरोपीय देशों ने भी कक्षाओं में स्मार्टफोन के उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाए हैं ताकि छात्रों का ध्यान न भटके।
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यूनाइटेड किंगडम (UK) भी इसी तरह के कानून पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
तकनीक और सुरक्षा का संतुलन
कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खरगे के अनुसार, सरकार इस प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विचार कर रही है। सरकार का उद्देश्य तकनीक को रोकना नहीं, बल्कि बच्चों को इसके खतरनाक जाल से बचाना है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) से चर्चा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
“बच्चों का भविष्य हमारे लिए सर्वोपरि है। मोबाइल की लत को शिक्षा और स्वास्थ्य पर हावी नहीं होने दिया जा सकता।” — सिद्धारमैया, मुख्यमंत्री