केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) बिल 2026 को लेकर विरोध की सुगबुगाहट अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले रही है। करणी सेना ने इस बिल के प्रावधानों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आगामी 1 फरवरी को ‘भारत बंद’ का ऐलान किया है। संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि यह नया कानून न केवल शिक्षा व्यवस्था के ढांचे को प्रभावित करेगा, बल्कि इससे छात्रों के भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के इंदौर में करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
शिक्षा नीतियों में बदलाव पर तकरार
करणी सेना का आरोप है कि यूजीसी बिल 2026 के जरिए शिक्षा के निजीकरण की राह खोली जा रही है। संगठन के स्थानीय नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि नए नियमों के लागू होने से उच्च शिक्षा सामान्य वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की पहुंच से दूर हो जाएगी। 1 फरवरी को होने वाले भारत बंद को सफल बनाने के लिए संगठन ने देश भर की अपनी विभिन्न इकाइयों को सक्रिय कर दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखेंगे, लेकिन यदि सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो आंदोलन को और अधिक विस्तार दिया जाएगा।
इंदौर में बढ़ा विरोध का शोर
इंदौर में करणी सेना के सदस्यों ने इस मुद्दे को लेकर एक बड़ी रैली निकाली। शहर के प्रमुख चौराहों पर प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ताओं ने आम जनता से भी इस बंद का समर्थन करने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यूजीसी के नए नियमों में स्वायत्तता के नाम पर जो बदलाव किए जा रहे हैं, वे शिक्षण संस्थानों की फीस बढ़ाने और आरक्षण की नीतियों को कमजोर करने की साजिश हैं। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि 1 फरवरी को आवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रखने का प्रयास किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और पुरानी मांगें
यह पहली बार नहीं है जब करणी सेना ने किसी सरकारी नीति या कानून के विरोध में इस तरह का कड़ा रुख अपनाया है। इससे पहले भी विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर संगठन ने सड़कों पर उतरकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। पुराने संदर्भों को देखें तो संगठन हमेशा से ही आरक्षण नीतियों और सांस्कृतिक संरक्षण के मुद्दों पर मुखर रहा है। यूजीसी बिल 2026 को लेकर उनका कहना है कि यह बिल बिना व्यापक चर्चा के लाया गया है, जिससे हितधारकों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
आगामी रणनीति और संभावित प्रभाव
भारत बंद के आह्वान को देखते हुए प्रशासनिक अमला भी सतर्क हो गया है। करणी सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook और X पर भी अभियान छेड़ दिया है ताकि अधिक से अधिक युवाओं को इस आंदोलन से जोड़ा जा सके। संगठन की योजना है कि 1 फरवरी को तहसील स्तर से लेकर जिला मुख्यालयों तक ज्ञापन सौंपे जाएं।
“हम शिक्षा के व्यवसायीकरण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। यूजीसी बिल 2026 के घातक परिणामों से समाज को बचाने के लिए 1 फरवरी का बंद एक निर्णायक कदम होगा।” — करणी सेना प्रतिनिधि
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बंद व्यापक स्तर पर होता है, तो इसका असर परिवहन और बाजार व्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस विरोध प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन करणी सेना अपने रुख पर अडिग है। आने वाले दिनों में संगठन अन्य छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश करेगा ताकि बंद को ऐतिहासिक बनाया जा सके।