Rangbhari Ekadashi 2026: काशी विश्वनाथ धाम में रंगभरी एकादशी का भव्य आयोजन, 1100 किलो फूलों से रचाई जाएगी कृष्ण संग पुष्प होली

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम में रंगभरी एकादशी के अवसर पर पारंपरिक धार्मिक उत्सव आयोजित किया गया। मंदिर परिसर को 1100 किलो फूलों से सजाया गया और अबीर-गुलाल के साथ होली उत्सव की शुरुआत की गई। काशी में इस तिथि को होली पर्व के प्रमुख आरंभिक आयोजन के रूप में देखा जाता है, इसलिए श्रद्धालुओं की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

मंदिर प्रशासन और सेवादारों ने सुबह से ही विशेष पूजा, श्रृंगार और दर्शन व्यवस्था को केंद्र में रखकर तैयारियां कीं। रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ के दरबार में पुष्प सज्जा और रंगों का प्रयोग काशी की पुरानी परंपरा का हिस्सा है। इसी क्रम में इस बार भी धाम का मुख्य परिसर, प्रवेश मार्ग और पूजन स्थल फूलों की सजावट से आच्छादित रहे।

आयोजन के दौरान भक्तों ने अबीर-गुलाल अर्पित कर भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। मंदिर क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठान तय क्रम में संपन्न हुए। होली से पहले होने वाले इस उत्सव को काशी की सांस्कृतिक-धार्मिक जीवनरेखा से जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि यहीं से शहर में रंगोत्सव का सार्वजनिक वातावरण तेज होता है।

रंगभरी एकादशी और काशी की परंपरा

रंगभरी एकादशी काशी के वार्षिक धार्मिक कैलेंडर की महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इस दिन बाबा विश्वनाथ के दरबार में होली के रंग चढ़ने की परंपरा लंबे समय से निभाई जाती रही है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बाहर से आने वाले भक्त भी इस आयोजन में शामिल होते हैं। इसी वजह से मंदिर क्षेत्र में इस दिन सामान्य दिनों की तुलना में अधिक आवाजाही रहती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पर्व शिवभक्ति और रंगोत्सव दोनों को जोड़ता है। इसलिए मंदिर में पूजा-पाठ के साथ उत्सवी स्वरूप भी दिखाई देता है। काशी विश्वनाथ धाम में होने वाले इस आयोजन को देखकर शहर के अन्य मंदिरों और अखाड़ों में भी होली कार्यक्रमों की रूपरेखा सक्रिय होती है।

1100 किलो फूलों की सजावट, अबीर-गुलाल का आयोजन

इस बार धाम में 1100 किलो फूलों का उपयोग सजावट के लिए किया गया। पुष्प सजावट को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में कई हिस्सों को थीम आधारित रूप दिया गया। इसके साथ ही परंपरा के अनुरूप अबीर-गुलाल से रंगार्चन हुआ। आयोजन का स्वरूप धार्मिक मर्यादा के भीतर रखा गया और पूजा प्रक्रिया के साथ रंगोत्सव को जोड़ा गया।

फूलों की मात्रा और रंगोत्सव की तैयारी ने इस आयोजन को विशेष बनाया। होली 2026 से पहले यह पहला बड़ा धार्मिक-सार्वजनिक संकेत माना जा रहा है। रंगभरी एकादशी के बाद वाराणसी में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर होली से जुड़े कार्यक्रमों की गति बढ़ने की संभावना रहती है।

होली 2026 की शुरुआत का संकेत

काशी विश्वनाथ धाम का यह आयोजन होली 2026 के प्रारंभिक धार्मिक पड़ाव के रूप में सामने आया है। रंगभरी एकादशी के साथ काशी में होली पर्व का वातावरण औपचारिक रूप से बनना शुरू हो जाता है। आने वाले दिनों में शहर के घाटों, मंदिरों और पारंपरिक संस्थानों में होली से जुड़े आयोजन क्रमशः दिखाई देते हैं।

धाम में आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था, स्थानीय परंपरा और सार्वजनिक सहभागिता का संयुक्त रूप रहा। 1100 किलो फूलों की सजावट और अबीर-गुलाल के उपयोग ने इसे दृश्य रूप से प्रमुख बनाया। काशी में होली की सांस्कृतिक धारा को समझने के लिए रंगभरी एकादशी का यह आयोजन केंद्रीय महत्व रखता है।