मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में भगोरिया हाट का रंगारंग आयोजन हुआ। धुलकोट में लगे इस पारंपरिक मेले में आदिवासी समुदाय ने जमकर उत्साह दिखाया। ढोल-मांदल की थाप पर लोगों ने पारंपरिक नृत्य किया।
क्या है भगोरिया हाट?
भगोरिया हाट मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों की अनूठी परंपरा है। होली से ठीक पहले यह विशेष हाट लगता है। इसमें आदिवासी युवक-युवतियां अपने जीवनसाथी चुनने का अवसर पाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
इस मेले में पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। ढोल, मांदल और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर सामूहिक नृत्य होता है। रंग-गुलाल उड़ाकर एक-दूसरे का स्वागत किया जाता है।
धुलकोट में दिखा भारी उत्साह
इस बार धुलकोट में भगोरिया हाट में भारी भीड़ उमड़ी। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार यहां पहुंचे। महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक परिधानों में सजधज कर हाट में शिरकत की।
हाट में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी थीं। पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों की खूब बिक्री हुई। गुलाब जामुन, जलेबी और भुट्टे जैसे खाद्य पदार्थों की स्टॉल पर काफी भीड़ देखी गई।
आदिवासी संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन
भगोरिया हाट आदिवासी संस्कृति का जीवंत प्रतीक माना जाता है। यह मेला न केवल सामाजिक मेलजोल का अवसर देता है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को भी जीवित रखता है। युवा पीढ़ी भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है।
ढोल-मांदल की गूंज के बीच आदिवासी नृत्य का नजारा अत्यंत मनमोहक रहा। समूह में नृत्य करते लोगों ने माहौल को उत्सवी बना दिया। रंग-बिरंगे कपड़ों और पारंपरिक आभूषणों में सजे आदिवासियों ने सबका ध्यान खींचा।
प्रशासन ने की व्यवस्था
स्थानीय प्रशासन ने भगोरिया हाट के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए। पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि मेले में कोई अप्रिय घटना न हो। पेयजल और साफ-सफाई की भी उचित व्यवस्था रखी गई।
खरगोन जिले में भगोरिया हाट की परंपरा लंबे समय से कायम है। हर साल होली से पहले यह मेला आदिवासी बहुल इलाकों में आयोजित होता है। इस बार भी धुलकोट सहित जिले के कई स्थानों पर इसका सफल आयोजन हुआ।
भगोरिया हाट मध्य प्रदेश की आदिवासी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह आयोजन हर साल देश भर से पर्यटकों और शोधकर्ताओं को भी आकर्षित करता है। आदिवासी संस्कृति के संरक्षण में इस मेले की अहम भूमिका मानी जाती है।