रसोई की लाइफलाइन: जानिए कैसे बनती है LPG गैस और भारत के किन कोनों में तैयार होती है?

आज भारत के लगभग 40 करोड़ घरों में सुबह की शुरुआत चाय की उसी सीटी से होती है जो रसोई गैस यानी LPG की बदौलत संभव है। उज्ज्वला योजना ने इस गैस को गांव की झोपड़ी से लेकर शहर के ऊंचे अपार्टमेंट्स तक पहुंचा दिया है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सिलेंडर को हम हर महीने बदलवाते हैं, उसके भीतर की तरल गैस आखिर आती कहां से है? क्या यह सीधे जमीन से निकलती है या इसे फैक्ट्रियों में बनाया जाता है? आइए, एलपीजी की उत्पत्ति से लेकर भारत में इसके उत्पादन केंद्रों तक की पूरी कहानी समझते हैं।
LPG: जमीन की गहराई से चूल्हे तक का सफर
आम धारणा के विपरीत, एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) कोई ऐसी गैस नहीं है जो जमीन से सीधे पाइप डालकर निकाली जाती है। असल में यह पेट्रोलियम उत्पादों के शुद्धिकरण (Refining) के दौरान निकलने वाला एक महत्वपूर्ण ‘बाय-प्रोडक्ट’ (Co-product) है। इसे मुख्य रूप से दो वैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा तैयार किया जाता है:
1. कच्चे तेल की रिफाइनिंग (Crude Oil Refining)
जब समुद्र या जमीन के नीचे से कच्चा तेल निकाला जाता है, तो वह गाढ़ा और काला होता है। इसे रिफाइनरी के ‘फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन’ टावरों में अत्यधिक उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है। जैसे-जैसे तेल गर्म होता है, उसके अलग-अलग घटक (जैसे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन) अलग होने लगते हैं। चूंकि एलपीजी सबसे हल्की होती है, इसलिए यह सबसे ऊपर गैस के रूप में जमा होती है। इसमें मुख्य रूप से प्रोपेन ($C_3H_8$) और ब्यूटेन ($C_4H_{10}$) का मिश्रण होता है।
2. प्राकृतिक गैस से निष्कर्षण
कई बार प्राकृतिक गैस के भंडारों में प्रोपेन और ब्यूटेन मिश्रित अवस्था में पाए जाते हैं। मशीनों के जरिए इन तत्वों को अलग कर लिया जाता है, जिससे शुद्ध रसोई गैस तैयार होती है।
गैस को ‘तरल’ बनाने का विज्ञान
इसका नाम ‘लिक्विफाइड’ पेट्रोलियम गैस इसलिए है क्योंकि इसे भारी दबाव (Pressure) के जरिए तरल में बदला जाता है।
  • वजह: गैस अवस्था में यह बहुत अधिक जगह घेरती है। इसे लिक्विड बनाने से कम जगह (सिलेंडर) में अधिक मात्रा में गैस भरी जा सकती है।
  • प्रक्रिया: जैसे ही आप चूल्हे का रेगुलेटर ऑन करते हैं, सिलेंडर के अंदर का दबाव कम होता है और वह तरल पदार्थ तुरंत वापस गैस बनकर बाहर निकलता है।
भारत का LPG मैप: कहां-कहां हैं उत्पादन के बड़े केंद्र?
भारत दुनिया के उन देशों में शुमार है जिसके पास कच्चे तेल को साफ करने का विशाल नेटवर्क है। हालांकि, हम अपनी जरूरत का केवल 40% ही खुद बना पाते हैं और बाकी 60% हिस्सा हमें कतर, सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों से आयात करना पड़ता है। देश के भीतर एलपीजी उत्पादन के मुख्य केंद्र निम्नलिखित हैं:
क्षेत्र
प्रमुख रिफाइनरी और स्थान
कंपनी
पश्चिम भारत
जामनगर (दुनिया की सबसे बड़ी), कोयाली, वडिनार
रिलायंस, IOCL, नायरा एनर्जी
उत्तर भारत
पानीपत (हरियाणा), बठिंडा (पंजाब), मथुरा (UP)
IOCL, HPCL-मित्तल
दक्षिण भारत
कोच्चि (केरल), मंगलौर (कर्नाटक), विशाखापत्तनम (AP), चेन्नई
BPCL, MRPL, HPCL, CPCL
पूर्वी भारत
पारादीप (ओडिशा), हल्दिया (पश्चिम बंगाल), बरौनी (बिहार)
IOCL
मध्य भारत
बीना (मध्य प्रदेश), विजयपुर (GAIL प्लांट)
BPCL, GAIL
रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी भारत के घरेलू उत्पादन का एक बहुत बड़ा स्तंभ है। इसके अलावा, गेल (GAIL) मध्य प्रदेश और गुजरात के गंधार में प्राकृतिक गैस से एलपीजी निकालने का काम करती है।
सुरक्षा का ‘बदबूदार’ राज: इथाइल मरकैप्टन
क्या आप जानते हैं कि शुद्ध एलपीजी में कोई गंध नहीं होती? अगर बिना गंध वाली गैस लीक हो जाए, तो हमें पता भी नहीं चलेगा और एक छोटा सा स्पार्क बड़े धमाके का कारण बन सकता है। इसी खतरे से बचने के लिए इसमें ‘इथाइल मरकैप्टन’ नाम का एक विशेष रसायन मिलाया जाता है। यही वह तीखी गंध है जो गैस लीक होने पर हमें तुरंत सचेत कर देती है।
वर्तमान संकट और आयात की चुनौती
वर्तमान में भारत ‘गैस राशनिंग’ जैसी स्थितियों का सामना कर रहा है। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव (जैसे अमेरिका-ईरान विवाद) है, जिससे खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। चूंकि भारत अपनी 60% मांग के लिए बाहरी देशों पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर आपकी रसोई के बजट और सप्लाई पर पड़ता है।