ब्रज की पारंपरिक लठमार होली के कार्यक्रम को लेकर 2026 की तारीखें साफ हो गई हैं। पंचांग गणना के मुताबिक इस बार बरसाना में लठमार होली 27 फरवरी 2026 को और नंदगांव में 28 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। हर साल की तरह दोनों स्थानों पर आयोजन होली से पहले होता है और देश-विदेश से श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं।
लठमार होली मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना और नंदगांव में होती है। बरसाना को राधा रानी की नगरी माना जाता है, जबकि नंदगांव भगवान कृष्ण से जुड़ा है। इसी कारण इन दो जगहों का कार्यक्रम ब्रज होली कैलेंडर में सबसे ज्यादा चर्चित माना जाता है।
क्या है 2026 की तिथि और क्रम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह उत्सव फाल्गुन शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। 2026 में बरसाना का आयोजन फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन पड़ रहा है। इसके अगले दिन, यानी फाल्गुन शुक्ल दशमी पर नंदगांव में लठमार होली का कार्यक्रम रहेगा। स्थानीय परंपरा में पहले बरसाना और फिर नंदगांव का क्रम लंबे समय से चला आ रहा है।
इस क्रम में नंदगांव के हुरियारे बरसाना पहुंचते हैं। वहां पारंपरिक होली खेली जाती है और महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से लाठियों से खेल करती हैं। अगले दिन बरसाना पक्ष नंदगांव जाता है और कार्यक्रम का स्वरूप वहीं दोहराया जाता है। यह पूरा आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा के तौर पर देखा जाता है।
लठमार होली का धार्मिक महत्व
ब्रज क्षेत्र की मान्यता है कि भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना आते थे और राधा रानी व सखियों के साथ होली की रसमय परंपरा निभती थी। उसी प्रसंग को लोकरीति में लठमार होली के रूप में याद किया जाता है। इसलिए इसे केवल उत्सव नहीं, बल्कि लीला-स्मरण की परंपरा भी माना जाता है।
इस दौरान मंदिरों में विशेष श्रृंगार, भजन, संकीर्तन और होली गीतों का आयोजन होता है। कई जगहों पर समाज गायन भी होता है, जहां पारंपरिक रागों में फाग गाए जाते हैं। श्रद्धालु इन आयोजनों में शामिल होकर ब्रज संस्कृति का अनुभव करते हैं।
कैसे मनाया जाता है यह उत्सव
लठमार होली में रंग, गुलाल, लोकगीत और पारंपरिक वेशभूषा प्रमुख हिस्से होते हैं। महिलाएं लाठी लेकर खेलती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। यह पूरा स्वरूप परंपरा के दायरे में होता है और स्थानीय समुदाय इसकी मर्यादा का ध्यान रखता है।
बरसाना के श्रीजी मंदिर और नंदगांव के प्रमुख मंदिरों में इन दिनों विशेष भीड़ रहती है। सुबह से धार्मिक कार्यक्रम शुरू होते हैं और दोपहर बाद होली का सार्वजनिक उत्सव तेज होता है। ब्रज यात्रा करने वाले लोग अक्सर इन दो दिनों को अपनी यात्रा का केंद्र बनाते हैं।
यात्रियों के लिए क्या जानना जरूरी
लठमार होली के दिनों में ब्रज क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसलिए यात्रा, ठहरने और स्थानीय परिवहन की योजना पहले से बनाना उपयोगी रहता है। भीड़ वाले इलाकों में प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना और समूह में रहना बेहतर माना जाता है।
रंगों से जुड़े आयोजनों में आंखों और त्वचा की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक स्थलों में प्रवेश के दौरान स्थानीय नियमों का पालन करना जरूरी होता है। परंपरा का सम्मान करते हुए भागीदारी करने पर ही इस उत्सव का वास्तविक अनुभव मिलता है।
कुल मिलाकर, लठमार होली 2026 का ब्रज कार्यक्रम 27 और 28 फरवरी को केंद्रित रहेगा। बरसाना और नंदगांव की यह परंपरा होली से पहले ब्रज में उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक आस्था, लोकसंस्कृति और सामुदायिक भागीदारी के कारण यह आयोजन हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहता है।