अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शिक्षा विभाग को समाप्त करने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए एक विवादास्पद कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने घोषणा की कि उनका प्रशासन अब शिक्षा को राज्य सरकारों को वापस सौंपेगा, ताकि शिक्षा नीति पर अधिक स्थानीय नियंत्रण हो सके।
देश के हित में काम नहीं कर रहा शिक्षा विभाग
व्हाइट हाउस में दिए अपने भाषण में ट्रंप ने कहा, “हमारा प्रशासन विभाग को बंद करने के लिए सभी वैध कदम उठाएगा, और हम इसे जितनी जल्दी हो सके बंद कर देंगे।” ट्रंप ने अमेरिकी शिक्षा प्रणाली की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा विभाग प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों में छात्रों की पढ़ाई और गणित में कम दक्षता को लेकर विफल रहा है। उनका तर्क था कि यह विभाग देश के लिए ‘कोई अच्छा काम नहीं कर रहा है’, और इसलिए इसे समाप्त करना जरूरी है। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि विभाग के महत्वपूर्ण कार्य जैसे पेल ग्रांट्स, टाइटल I, और विकलांग बच्चों के लिए वित्तीय सहायता ‘पूरी तरह संरक्षित’ रहेंगे। इन संसाधनों को अन्य सरकारी एजेंसियों में पुनर्वितरित किया जाएगा, ताकि वे प्रभावित न हों। पेल ग्रांट वह संघीय वित्तीय सहायता है, जो कम आय वाले छात्रों को कॉलेज की फीस भरने में मदद करती है। वहीं, ‘टाइटल I’ के तहत, उन स्कूलों को संघीय फंड मिलता है, जहां कम आय वाले परिवारों के बच्चे ज्यादा संख्या में पढ़ते हैं।
आदेश का विरोध भी शुरू
इस आदेश पर कांग्रेसनल एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस की अध्यक्ष प्रतिनिधि ग्रेस मेंग और शिक्षा टास्क फोर्स के अध्यक्ष प्रतिनिधि मार्क ताकानो ने आलोचना करते हुए कहा, “ट्रंप प्रशासन अगली पीढ़ी को जरूरी संसाधनों से वंचित कर रहा है, ताकि अरबपतियों को कर छूट का फायदा मिल सके। यह छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ विश्वासघात है।” इसके अलावा, उनका कहना था कि यह आदेश एक गैरकानूनी फैसला है, और कांग्रेस को इसे चुनौती देने के लिए अपने अधिकारों का बचाव करना चाहिए। अमेरिका में संघीय एजेंसियों की स्थापना या विघटन के लिए आमतौर पर कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि ट्रंप इस कार्यकारी आदेश को कैसे लागू करेंगे, क्योंकि इसे कानूनन स्वीकृति प्राप्त करने के लिए विधायी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।