लोकसभा में महिला आरक्षण पर बहस: विपक्ष ने घेरा, अखिलेश की मुस्लिम कोटे की मांग पर शाह का तीखा पलटवार

नई दिल्ली: आज लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर घमासान छिड़ गया है। लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने जहां इसे ‘संविधान का अपहरण’ करार दिया, वहीं सरकार ने इसे नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
सदन में शक्ति प्रदर्शन: वोटिंग के बाद चर्चा शुरू
विधेयकों पर चर्चा शुरू करने को लेकर सदन में वोटिंग कराई गई, जिसमें सरकार का पलड़ा भारी रहा। पक्ष में 251 और विपक्ष में 185 वोट पड़े। इसके साथ ही 16 और 17 अप्रैल को कुल 15 घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। इन बिलों पर अंतिम निर्णय 17 अप्रैल को शाम 4 बजे होने वाली वोटिंग के जरिए होगा।
मुख्य विवाद: परिसीमन और मुस्लिम आरक्षण
चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मांग रखी कि महिला आरक्षण के भीतर मुस्लिम महिलाओं के लिए भी अलग से कोटा निर्धारित किया जाए। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

“मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण देना असंवैधानिक है। यदि समाजवादी पार्टी को इतनी ही चिंता है, तो वे अपने कोटे की सभी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दें, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।”

दूसरी ओर, ANI से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा 90% पुरानी बातें ही दोहरा रही है। कांग्रेस का मुख्य विरोध महिला आरक्षण को परिसीमन (Delimitation) से जोड़ने पर है। विपक्ष का तर्क है कि आरक्षण को तुरंत लागू किया जाना चाहिए, न कि परिसीमन की लंबी प्रक्रिया में फंसाना चाहिए।
प्रस्तावित संशोधन: 850 सांसदों वाली होगी नई लोकसभा
सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधनों में देश के राजनीतिक ढांचे को बदलने का बड़ा प्रस्ताव है:
  • लोकसभा सीटों में वृद्धि: वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
  • सीटों का बंटवारा: राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें प्रस्तावित हैं।
  • महिला कोटा: कुल सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
  • परिसीमन: सीटों की सटीक संख्या और उनकी सीमाओं को तय करने के लिए नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा।
“संविधान को हाईजैक करने की साजिश”: कांग्रेस
ANI से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे वर्गों को बांटने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष 2023 में पारित मूल प्रस्ताव के साथ है, लेकिन सरकार परिसीमन के बहाने संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है। वहीं, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बचाव करते हुए कहा कि मोदी सरकार के पास सामाजिक न्याय के लिए नीति भी है और नियत भी।
राज्यसभा में भी हलचल: उपाध्यक्षों के पैनल का पुनर्गठन
संसदीय कार्यवाही के बीच राज्यसभा में भी बड़े बदलाव हुए हैं। उपाध्यक्षों के पैनल का पुनर्गठन किया गया है, जिसमें विभिन्न दलों के 6 सदस्यों को जगह मिली है:
  1. भाजपा: दिनेश शर्मा, एस फांगनोन कोन्याक, घनश्याम तिवारी।
  2. कांग्रेस: फूलो देवी नेताम।
  3. AIADMK: एम. थंबीदुरई।
  4. BJD: सस्मित पात्रा। यह नया पैनल 15 अप्रैल से प्रभावी हो गया है।
निष्कर्ष…
सदन में वर्तमान गतिरोध से स्पष्ट है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल नारी सशक्तीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के चुनावी भूगोल (परिसीमन) और जातिगत/धार्मिक समीकरणों से भी गहराई से जुड़ गया है। अब सबकी नजरें 17 अप्रैल की शाम पर टिकी हैं, जब इन विधेयकों का भविष्य तय होगा।