लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर भारी हंगामा, सदन की कार्यवाही 3 बजे तक स्थगित

New Delhi: लोकसभा में सोमवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी ने डोकलाम का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी सेना भारतीय सीमा में घुसपैठ कर रही है।

राहुल गांधी के इस बयान पर सत्ता पक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी विरोध जताया। माहौल इतना गर्म हो गया कि सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

राहुल गांधी ने क्या कहा

लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने चीन से जुड़े सुरक्षा मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि चीनी टैंक भारतीय सीमा के करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने एक किताब का हवाला देते हुए यह दावा किया।

हालांकि सत्ता पक्ष ने इसे बिना प्रमाण का बयान बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि बिना छपी किताब का सदन में जिक्र करना उचित नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी से तथ्यों के साथ बात करने की अपील की।

अमित शाह की आपत्ति

गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के बयान पर सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना प्रामाणिकता के बयान देना गलत है। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

इस दौरान सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्पीकर को बीच-बचाव करना पड़ा।

अखिलेश यादव ने किया समर्थन

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चीन का मुद्दा बेहद संवेदनशील है। देश को चीन से सावधान रहने की जरूरत है।

अखिलेश ने मांग की कि राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवने की किताब का हवाला पढ़ने दिया जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।

सदन की कार्यवाही स्थगित

हंगामे को देखते हुए अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए रोक दी गई। इस दौरान दोनों पक्षों के नेताओं के बीच बातचीत जारी रही।

यह पहली बार नहीं है जब चीन के मुद्दे पर संसद में तनाव देखा गया हो। सीमा विवाद को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच अक्सर टकराव होता रहा है।

डोकलाम विवाद की पृष्ठभूमि

डोकलाम भारत, चीन और भूटान की सीमाओं का संगम स्थल है। 2017 में यहां दोनों देशों की सेनाओं के बीच 73 दिनों तक गतिरोध रहा था। तब से यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर भारत हमेशा सतर्क रहता है। सीमा पर बुनियादी ढांचे के निर्माण को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव रहा है।

आगे क्या होगा

दोपहर 3 बजे के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू होगी। उम्मीद है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा आगे बढ़ेगी। हालाकि चीन का मुद्दा इस सत्र में गर्म रहने की संभावना है।

विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सीमा पूरी तरह सुरक्षित है। यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।