MP Weather: मध्य प्रदेश में मार्च में ही अप्रैल जैसी तपिश, कई शहरों में पारा 35 डिग्री के पार, बढ़ी गर्मी से लोग बेहाल

मध्य प्रदेश में इस बार फरवरी के महीने में ही गर्मी का असर साफ दिखा। सामान्य तौर पर मार्च में दिखने वाली तपिश कई शहरों में फरवरी के आखिरी हिस्से में महसूस की गई। दिन का तापमान तेजी से बढ़ने और हवा के शुष्क रहने से दोपहर का मौसम ज्यादा गर्म रहा। अब मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले दिनों में स्थितियां आंशिक रूप से बदल सकती हैं।

मौसम विभाग के ताजा संकेत बताते हैं कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर प्रदेश के मौसम में बदलाव आ सकता है। इसका असर खासतौर पर मार्च की शुरुआत में दिखने की संभावना है। इस दौरान बादल छाने, कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और कहीं-कहीं गरज के साथ बूंदाबांदी जैसी स्थिति बन सकती है।

फरवरी की गर्मी को लेकर मुख्य वजह साफ आसमान, नमी की कमी और दिन में तेज धूप मानी जा रही है। रात के तापमान में बहुत बड़ी गिरावट न होने से दिन-रात के तापमान के अंतर का असर भी बढ़ा। नतीजतन लोगों को सुबह और शाम अपेक्षाकृत हल्का मौसम मिला, लेकिन दोपहर में गर्मी तेज रही।

मार्च में किस तरह बदल सकता है मौसम

पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हवा की दिशा में बदलाव आता है और ऊपरी स्तर पर नमी बढ़ती है। ऐसे में प्रदेश के अलग-अलग संभागों में मौसम का स्वरूप एक जैसा नहीं रहेगा। कुछ इलाकों में केवल बादल और हल्की ठंडक रह सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा की स्थिति बन सकती है।

मौसम विशेषज्ञों का आकलन है कि यह बदलाव स्थायी ठंडक नहीं लाएगा। बारिश या बादल के बाद फिर से तापमान ऊपर जा सकता है। यानी मार्च के दौरान गर्मी और अंतराल वाली राहत, दोनों स्थितियां साथ-साथ देखने को मिल सकती हैं।

शहर और ग्रामीण इलाकों पर अलग असर

शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट सतह और ट्रैफिक के कारण गर्मी का असर अधिक महसूस होता है। इसलिए बादल छाने के बावजूद उमस जैसी स्थिति कुछ घंटों तक रह सकती है। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश की हल्की गतिविधि से सतह का तापमान कुछ समय के लिए नीचे आ सकता है, जिससे दोपहर का तापमान कम तीखा लग सकता है।

प्रदेश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में बादल और हवाओं का प्रभाव अलग रह सकता है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी इलाकों में स्थानीय मौसम कारक ज्यादा असर डालते हैं। यही कारण है कि एक ही दिन में अलग-अलग जिलों में मौसम की तस्वीर अलग दिखती है।

खेती और जनजीवन के लिए क्या मायने

रबी फसलों के लिए मार्च की शुरुआत का मौसम महत्वपूर्ण रहता है। हल्की बारिश खेतों को नमी दे सकती है, लेकिन तेज हवा या असमय वर्षा कुछ फसलों पर दबाव भी बढ़ा सकती है। इसलिए किसानों को स्थानीय मौसम बुलेटिन के आधार पर सिंचाई, दवा छिड़काव और कटाई से जुड़े फैसले चरणबद्ध तरीके से लेने की सलाह दी जाती है।

जनजीवन के स्तर पर फरवरी जैसी गर्म दोपहर से बचाव अब भी जरूरी है। मौसम बदलने के बावजूद धूप की तीव्रता कम नहीं मानी जानी चाहिए। बाहर निकलने का समय, पानी का सेवन और दोपहर में लंबे समय तक खुली धूप से बचाव जैसे साधारण उपाय अगले कुछ हफ्तों में भी उपयोगी रहेंगे।

आगे की तस्वीर

मध्य प्रदेश में मौसम फिलहाल संक्रमण चरण में है, जहां गर्मी का शुरुआती दबाव और पश्चिमी विक्षोभ से मिलने वाली अस्थायी राहत साथ-साथ चल सकती है। मार्च के पहले हिस्से में बादल और हल्की बारिश की संभावना के बाद फिर तापमान में बढ़त लौटने के संकेत हैं। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक जिला-स्तरीय पूर्वानुमान पर नजर रखना सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।

फरवरी की तेज गर्मी ने यह संकेत दिया है कि इस बार मौसमी बदलाव जल्दी और तीखे रूप में सामने आ सकते हैं। मार्च की शुरुआत में संभावित बारिश राहत दे सकती है, लेकिन प्रदेश में गर्मी का समग्र रुझान बना रहने की संभावना है।