एमपी में पहली बार मोबाइल ऐप से होगी गिद्धों की गणना, सात प्रजातियों की मॉनिटरिंग पर रहेगा खास फोकस

मध्य प्रदेश के वन विभाग ने गिद्धों की गणना के लिए अनूठी पहल शुरू की है। राज्य में पहली बार मोबाइल ऐप की मदद से गिद्धों की गिनती होगी। इस तकनीक आधारित कदम से गिद्ध संरक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

7 प्रजातियों पर विशेष निगरानी

मध्य प्रदेश में गिद्धों की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं। वन विभाग इन सभी प्रजातियों पर करीबी नजर रखेगा। इनमें सफेद पीठ वाला गिद्ध, लंबी चोंच वाला गिद्ध, राज गिद्ध और अन्य दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं। इन प्रजातियों की सटीक संख्या का आकलन इस गणना का मुख्य उद्देश्य है।

कैसे काम करेगा मोबाइल ऐप

इस ऐप के जरिए वन कर्मचारी और स्वयंसेवक गिद्धों की लोकेशन, संख्या और प्रजाति की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। रियल टाइम डेटा संग्रह से गणना की सटीकता बढ़ेगी। पहले गिद्ध गणना पारंपरिक तरीकों से होती थी जिसमें त्रुटि की संभावना अधिक रहती थी।

मोबाइल ऐप से प्राप्त आंकड़े एक केंद्रीय डैशबोर्ड पर एकत्रित होंगे। इससे विशेषज्ञों को गिद्धों के वितरण और आबादी के रुझान समझने में मदद मिलेगी। जीपीएस आधारित ट्रैकिंग से गिद्धों के निवास क्षेत्रों की सटीक मैपिंग भी संभव होगी।

गिद्ध संरक्षण क्यों जरूरी

गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाते हैं। ये प्रकृति के सफाईकर्मी कहे जाते हैं। मृत पशुओं को खाकर ये बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं। पिछले कुछ दशकों में डाइक्लोफेनेक दवा के उपयोग से गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट आई थी।

भारत में गिद्धों की संख्या 1990 के दशक में करोड़ों में थी। लेकिन पशुओं को दी जाने वाली दर्दनिवारक दवा डाइक्लोफेनेक से गिद्धों की 99 प्रतिशत से अधिक आबादी समाप्त हो गई। सरकार ने 2006 में इस दवा के पशु चिकित्सा में उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था।

मध्य प्रदेश में गिद्धों की स्थिति

मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहां गिद्धों की अच्छी आबादी बची है। राज्य के कई वन क्षेत्रों और चट्टानी इलाकों में गिद्ध प्रजनन करते हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व, सतपुड़ा और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में गिद्ध नियमित रूप से देखे जाते हैं।

इस ऐप आधारित गणना से वन विभाग को यह जानने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में गिद्धों की संख्या बढ़ रही है और कहां गिरावट आ रही है। इससे संरक्षण रणनीति को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

तकनीक से बदलेगा वन्यजीव सर्वेक्षण

मोबाइल ऐप का उपयोग वन्यजीव गणना में नई शुरुआत है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो अन्य वन्यजीवों की गणना में भी इस तकनीक को अपनाया जा सकता है। डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह में पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेगी।

वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि तकनीक आधारित दृष्टिकोण से गिद्ध संरक्षण को नई गति मिलेगी। इस गणना के परिणाम भविष्य की नीतियों और कार्ययोजनाओं का आधार बनेंगे।

मध्य प्रदेश का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है। देश भर में गिद्ध संरक्षण के प्रयास तेज हो रहे हैं और ऐसी तकनीकी पहल इन प्रयासों को और मजबूत बनाएगी।