विंध्य मेट्रोपॉलिटन रीजन को मंजूरी: रीवा, सतना समेत MP के 5 जिले होंगे शामिल, सरकार ने जारी की अधिसूचना

भोपाल: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में शहरी विकास को नई दिशा देने और अनियोजित बसाहट को रोकने के लिए सरकार ने ‘विंध्य मेट्रोपॉलिटन रीजन’ के गठन को मंजूरी दे दी है। इस नए महानगरीय क्षेत्र में रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली और नवगठित मऊगंज जिले को शामिल किया गया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य इन जिलों में अनियोजित शहरीकरण को नियंत्रित कर सुनियोजित और एकीकृत विकास को बढ़ावा देना है।

राज्य सरकार ने इस संबंध में ‘राज्य महानगरीय विकास प्राधिकरण अधिनियम-2023’ के प्रावधानों के तहत अधिसूचना जारी कर दी है। यह प्राधिकरण भोपाल, इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर काम करेगा, जहां पहले से ही महानगरीय विकास प्राधिकरण गठित हैं। इस कदम से विंध्य क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, आवास और अन्य नागरिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार होने की उम्मीद है।

कैसी होगी प्राधिकरण की संरचना?

विंध्य मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए गठित होने वाले प्राधिकरण के अध्यक्ष रीवा के संभागायुक्त होंगे। वहीं, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज जिलों के कलेक्टर इसके सदस्य के रूप में काम करेंगे। प्राधिकरण में एक मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) भी नियुक्त किया जाएगा, जो इसके दैनिक कामकाज और योजनाओं के क्रियान्वयन की देखरेख करेगा। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा अन्य सदस्य भी नामित किए जाएंगे।

विकास का मास्टर प्लान और अधिकार

यह प्राधिकरण अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पांचों जिलों के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करेगा। इसका मुख्य काम विकास योजनाओं को लागू करना और निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। प्राधिकरण को सड़क, पानी की सप्लाई, सीवेज नेटवर्क, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण की जिम्मेदारी और अधिकार मिलेंगे।

इसके अलावा, प्राधिकरण अवैध कॉलोनियों और अनियोजित निर्माण पर भी सख्ती से लगाम लगाएगा। किसी भी नए निर्माण या विकास परियोजना के लिए प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह भूमि अधिग्रहण करने और विकास योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में भी सक्षम होगा।

क्यों पड़ी इस रीजन की जरूरत?

विंध्य क्षेत्र, विशेषकर रीवा और सतना जैसे शहर, तेजी से फैल रहे हैं। इस विस्तार के साथ अनियोजित बसाहट और अवैध निर्माण की समस्या भी बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि एक एकीकृत प्राधिकरण के बिना इन शहरों का व्यवस्थित विकास संभव नहीं है। यह प्राधिकरण इन पांचों जिलों के विकास को एक साथ समन्वित करेगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और संतुलित विकास सुनिश्चित होगा।

वित्तीय रूप से यह प्राधिकरण आत्मनिर्भर होगा। यह विकास परियोजनाओं के लिए ऋण ले सकेगा, बॉन्ड जारी कर सकेगा और अपनी संपत्तियों से आय अर्जित कर सकेगा। इससे सरकारी खजाने पर बोझ कम पड़ेगा और विकास कार्यों में तेजी आएगी।

विंध्य के लिए एक नई सुबह

विंध्य मेट्रोपॉलिटन रीजन का गठन इस क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे न केवल शहरी क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सुनियोजित विकास से पर्यावरण संरक्षण और ट्रैफिक प्रबंधन जैसी भविष्य की चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलेगी।