केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी नए प्रोटोकॉल के बाद मध्य प्रदेश में भी इसे लागू करने की घोषणा कर दी गई है। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार अब ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंद पूरे सम्मान के साथ गाए जाएंगे और इसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले प्रस्तुत किया जाएगा। इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने वाला कदम बताया और कहा कि यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की ऐतिहासिक रचना को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाखों देशवासियों को प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि देशवासियों की भावनाओं की अभिव्यक्ति है। यह गीत मातृभूमि के प्रति समर्पण, त्याग और एकता का प्रतीक रहा है। उनके अनुसार, इस गीत ने आजादी की लड़ाई में सेनानियों के मन में उत्साह और जोश भरने का काम किया था, और आज भी यह भारतीयों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। उन्होंने इसे राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा गीत बताते हुए नागरिकों से इसे पूरे सम्मान के साथ अपनाने का आह्वान किया।
सीएम ने अपने संदेश में कहा कि यह गीत भारतीयों की धड़कनों में बसता है और देश के प्रति कर्तव्यबोध की याद दिलाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ‘वंदे मातरम’ के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा और सेवा का संकल्प दोहराएं। उनके अनुसार, यह गीत देश की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता का सशक्त प्रतीक है, जिसे नई पीढ़ी तक सम्मानपूर्वक पहुंचाना जरूरी है।
मध्य प्रदेश में इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही गई है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, शासकीय कार्यक्रमों, विद्यालयों तथा अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंद गाना अनिवार्य रहेगा। साथ ही, इसे प्रस्तुत करते समय सभी उपस्थित लोगों को खड़े होकर सम्मान प्रकट करना होगा। राज्य सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था के माध्यम से राष्ट्रगीत के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना को और मजबूत किया जाएगा।