मध्य प्रदेश के शहरों में अब जमीन के नीचे बिछी पानी और सीवर की लाइनों की जांच का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। नगरीय प्रशासन विभाग ने लाइनों में लीकेज और अन्य खामियों को खोजने के लिए मानवीय श्रम की जगह आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। अब प्रदेश में रोबोट और सेंसर के जरिए अंडरग्राउंड पाइपलाइनों की निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही, विभाग ने ‘अमृत रेखा’ (Amrit Rekha) नामक एक विशेष ऐप भी तैयार किया है, जो इन व्यवस्थाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगा।
शहरी क्षेत्रों में अक्सर पुरानी पाइपलाइनों में टूट-फूट या लीकेज की समस्या आम बात है। कई बार यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि जमीन के नीचे लीकेज ठीक किस जगह पर है। इस कारण अंधाधुंध खुदाई करनी पड़ती है, जिससे सड़कों को नुकसान पहुंचता है और जनता को परेशानी होती है। नई तकनीक के आने से अब सटीक स्थान का पता लगाकर केवल आवश्यक जगह पर ही मरम्मत की जा सकेगी।
‘अमृत रेखा’ ऐप से डिजिटल मॉनिटरिंग
सरकार द्वारा लॉन्च किए गए ‘अमृत रेखा’ ऐप के जरिए अधिकारियों के पास शहर की जल और सीवर लाइनों का पूरा डिजिटल नक्शा उपलब्ध होगा। यह ऐप जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) पर आधारित होगा। इसके माध्यम से यह देखा जा सकेगा कि कौन सी लाइन कहां से गुजर रही है, उसकी गहराई कितनी है और वह कितनी पुरानी है। यदि किसी क्षेत्र में पानी की आपूर्ति बाधित होती है या सीवर चोक होता है, तो ऐप पर तुरंत अलर्ट प्राप्त होगा, जिससे त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।
गंदे पानी और बीमारियों से मिलेगी मुक्ति
अक्सर देखा गया है कि पानी की पाइपलाइन और सीवर लाइन पास-पास होने के कारण लीकेज की स्थिति में पीने का पानी दूषित हो जाता है। गंदा पानी घरों तक पहुंचने से पीलिया, हैजा और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां फैलती हैं। रोबोटिक जांच से ऐसे लीकेज को समय रहते पकड़ा जा सकेगा। रोबोट पाइप के अंदर जाकर वीडियो और इमेज के जरिए यह बता देगा कि कहां पर दरार है या कहां सीवर का पानी मिक्स हो रहा है। इससे स्वास्थ्य सुरक्षा में बड़ा सुधार आएगा।
मैनुअल स्कैवेंजिंग का जोखिम होगा कम
सीवर लाइनों की सफाई और मरम्मत के लिए कई बार सफाई कर्मचारियों को मैनहोल में उतरना पड़ता है, जो बेहद जोखिम भरा होता है। जहरीली गैसों के कारण कई बार हादसे भी हो चुके हैं। रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल से इंसानों को सीवर लाइन के अंदर भेजने की जरूरत कम हो जाएगी। यह कदम न केवल आधुनिकता की ओर है, बल्कि सफाई मित्रों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ी पहल मानी जा रही है।
जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
मध्य प्रदेश के कई शहरों में जल संकट एक बड़ी चुनौती है। एक अनुमान के मुताबिक, सप्लाई के दौरान लीकेज की वजह से बड़ी मात्रा में साफ पानी बर्बाद हो जाता है। नई तकनीक से इस बर्बादी (Non-Revenue Water) को रोका जा सकेगा। ‘अमृत रेखा’ ऐप के जरिए जल प्रदाय की मात्रा और खपत का भी सही लेखा-जोखा रखा जा सकेगा, जिससे जल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के प्रमुख शहरों में लागू किया जाएगा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पहले से ही कई शहरों में तकनीकी काम चल रहे हैं, और ‘अमृत रेखा’ ऐप इस कड़ी में एक महत्वपूर्ण जोड़ साबित होगा।