मध्य प्रदेश सरकार शराब के कारोबार को माफिया, अनियमितताओं और वर्षों से चले आ रहे खेल से मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। नई आबकारी नीति में डिजिटल सिस्टम को अनिवार्य करते हुए ट्रैक एंड ट्रेस तकनीक लागू की जा रही है। इसके तहत शराब की हर बोतल पर एक स्मार्ट यूनिक होलोग्राम लगाया जाएगा, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि बोतल कब, कहां और किस रास्ते से उपभोक्ता तक पहुंची। डिस्टिलरी से निकलने वाली हर बोतल अब सिस्टम की नजर में रहेगी।
डिस्टिलरी से ग्राहक तक हर कदम पर नजर
नई व्यवस्था में शराब के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बिक्री—इन चारों चरणों को एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। जैसे ही किसी बोतल पर लगे होलोग्राम या क्यूआर कोड को स्कैन किया जाएगा, आबकारी विभाग के सर्वर पर उसकी पूरी जानकारी सामने आ जाएगी। इसमें यह साफ दिखेगा कि शराब किस डिस्टिलरी में बनी, किस वेयरहाउस में रखी गई, किस दुकान पर पहुंची और आखिरकार किस समय बेची गई। इससे सिस्टम में कोई भी कड़ी छुपी नहीं रहेगी।
नकली शराब और ओवररेटिंग पर सीधा प्रहार
इस डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नकली शराब, अवैध सप्लाई और ओवररेटिंग जैसे मामलों पर सीधा अंकुश लगेगा। वर्षों से शिकायतें आती रही हैं कि ठेकेदार तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलते हैं या बिना बिल के शराब बेचते हैं। अब हर बोतल सिस्टम में दर्ज होगी, जिससे मनमानी की गुंजाइश काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
पहले भी हुई थी घोषणा, लेकिन जमीन पर नहीं उतरा सिस्टम
गौर करने वाली बात यह है कि क्यूआर कोड और डिजिटल निगरानी की बातें पिछले साल भी की गई थीं, लेकिन हकीकत में सिस्टम पुरानी मैनुअल व्यवस्था पर ही चलता रहा। इसका फायदा उठाकर कई ठेकेदार नियमों को ताक पर रखते रहे। यहां तक कि 2025-26 की नीति में हर दुकान पर पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन अनिवार्य की गई थी, ताकि हर बोतल का डिजिटल बिल बने, लेकिन एक साल बाद भी यह नियम कागजों से बाहर नहीं निकल पाया।
18 हजार करोड़ के राजस्व पर सरकार की नजर
प्रदेश में इस समय लगभग 3,500 शराब दुकानें संचालित हैं। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 18,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है। आबकारी अधिकारियों का मानना है कि अगर यह ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम सही तरीके से लागू हुआ और रियल-टाइम मॉनिटरिंग हुई, तो टैक्स लीकेज पूरी तरह बंद होगा और राजस्व में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।
उड़नदस्तों को भी मिलेगा टेक्नोलॉजी का सहारा
नई व्यवस्था में केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि आबकारी विभाग की उड़नदस्तों को भी तकनीकी रूप से मजबूत किया जा रहा है। विभाग का फोकस अब पूरी तरह पारदर्शिता और जवाबदेही पर है। हर बोतल पर यूनिक होलोग्राम होने से जांच के दौरान मौके पर ही उसकी वैधता जांची जा सकेगी।
अधिकारियों का दावा: अवैध बिक्री पर लगेगी लगाम
आबकारी विभाग के संभागीय उड़नदस्ता प्रभारी उपायुक्त संदीप शर्मा के मुताबिक, नई प्रणाली से अवैध बिक्री, ओवररेटिंग और टैक्स चोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। उनका कहना है कि हर बोतल की मूवमेंट ट्रैक होने से न सिर्फ सिस्टम पारदर्शी बनेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी भरोसा मिलेगा कि वे सही कीमत पर वैध शराब खरीद रहे हैं।
कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल अगर इस बार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, तो मध्य प्रदेश में शराब कारोबार की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। डिजिटल निगरानी से जहां माफिया और गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी, वहीं सरकार के खजाने को भी मजबूत करने में यह कदम अहम साबित हो सकता है।