मध्य प्रदेश के टमाटर की ग्लोबल मार्केट में धाक, देशभर के 12 राज्यों तक पहुंच रही सप्लाई

खेती-किसानी के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने बीते वर्षों में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उत्पादन, उत्पादकता और नवाचार के मामले में प्रदेश लगातार अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। कृषि विकास दर और रिकॉर्ड उत्पादन के चलते राज्य को कई बार कृषि कर्मण अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। अब राज्य सरकार इन उपलब्धियों को बनाए रखने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में ठोस रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है, ताकि किसानों की आय बढ़ाने, लागत घटाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में ठोस पहल की जा सके।

सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बहुआयामी योजनाएं तैयार की हैं। फसल विविधीकरण, सिंचाई विस्तार, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और बाजार से सीधी कनेक्टिविटी जैसे विषय प्राथमिकता में हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकार ने कृषि से जुड़े मुद्दों पर विशेष फोकस करते हुए “कृषि केबिनेट” आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि खेती-किसानी से संबंधित फैसले जमीनी जरूरतों के अनुरूप लिए जा सकें। इस पहल को प्रदेश के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पहली कृषि केबिनेट 2 मार्च को नागलवाड़ी गांव में आयोजित होगी, जो बड़वानी जिला के अंतर्गत आता है। जनजातीय बहुल यह क्षेत्र टमाटर उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां की उपज न केवल दिल्ली समेत कई राज्यों में भेजी जाती है, बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग रहती है। नागलवाड़ी के टमाटरों की गुणवत्ता और स्वाद ने इसे विशेष पहचान दिलाई है। ऐसे कृषि प्रधान क्षेत्र में कैबिनेट बैठक आयोजित करना सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट दर्शाता है।

कार्यक्रम की तैयारियां जिला प्रशासन की निगरानी में अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। कलेक्टर जयति सिंह स्वयं सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, मंच व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं। बैठक के लिए लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में विशेष गार्डन में एयर कंडीशनर डोम तैयार किए गए हैं, ताकि आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके। मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य पूरे दिन नागलवाड़ी में मौजूद रहेंगे। बैठक में किसानों की आय दोगुनी करने, फसल प्रसंस्करण को बढ़ावा देने और विपणन व्यवस्था मजबूत करने जैसे विषयों पर अहम निर्णय लिए जाने की संभावना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से संकेत दिया है कि होली के अवसर पर किसानों को विशेष सौगात दी जाएगी। माना जा रहा है कि कृषि केबिनेट के दौरान ऐसी योजनाओं की घोषणा हो सकती है, जो सीधे तौर पर किसानों के हित में हों। इससे प्रदेश के अन्नदाताओं में उत्साह का माहौल है और वे इस बैठक को ऐतिहासिक मान रहे हैं।

निमाड़ क्षेत्र अपनी उपजाऊ मिट्टी के लिए जाना जाता है। यहां सोयाबीन और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के साथ-साथ मिर्च, हल्दी और धनिया जैसी मसाला फसलें भी बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। लेकिन नागलवाड़ी की पहचान विशेष रूप से टमाटर उत्पादन से जुड़ी है। यहां के किसान लंबे समय से टमाटर प्रसंस्करण इकाई, विशेषकर टोमेटो कैचप प्लांट की स्थापना की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित हो जाए तो उन्हें उचित मूल्य मिलेगा, बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और खराब होने वाली उपज का नुकसान भी कम होगा। कृषि केबिनेट से किसानों को उम्मीद है कि इस दिशा में ठोस निर्णय लिया जाएगा, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।