आज से माघ गुप्त नवरात्रि शुरू, जानिए पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

Gupt Navratri 2026: आज यानी 19 जनवरी 2026 से माघ मास की गुप्त नवरात्रि का आगाज़ हो गया है। तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह समय अत्यंत फलदायी माना जाता है। जहाँ सामान्य नवरात्रि में माता के नौ रूपों की पूजा सार्वजनिक रूप से की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की गोपनीय साधना का विधान है।
इस वर्ष गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू होकर 27 जनवरी 2026 तक चलेगी। यदि आप आज सुबह के मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाए हैं, तो ज्योतिषीय गणना के अनुसार अभी भी आपके पास माता के स्वागत का शुभ अवसर शेष है।
सुबह का मुहूर्त निकला, तो अब कब करें घटस्थापना?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) का विशेष महत्व होता है। आज सुबह कलश स्थापना का समय 06:43 बजे से 10:24 बजे तक था।
यदि किसी कारणवश आप इस समय चूक गए हैं, तो अभिजीत मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ विकल्प है।
  • अभिजीत मुहूर्त का समय: दोपहर 12:11 बजे से 12:53 बजे तक।
  • विशेष योग: आज सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो सुबह 11:52 से शुरू होकर अगले दिन 20 जनवरी की शाम तक रहेगा। इस योग में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
10 महाविद्याओं की विशेष साधना
गुप्त नवरात्रि में माँ काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जो भक्त इन नौ दिनों में बाहरी दुनिया से कटकर गोपनीय तरीके से साधना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
सरल एवं सिद्ध पूजा विधि
  1. शुद्धि: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. स्थान चयन: पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और वहां लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
  3. कलश स्थापना: तांबे या मिट्टी के कलश में स्वच्छ जल भरें। उसमें सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और ऊपर से नारियल (लाल कपड़े में लिपटा हुआ) स्थापित करें।
  4. संकल्प: हाथ में जल लेकर अपनी पूजा का संकल्प लें और सबसे पहले प्रथम पूज्य गणेश जी का आह्वान करें।
  5. अर्चन: माता रानी को रोली, सिंदूर, चुनरी, फूल और भोग अर्पित करें। घी का अखंड दीपक या धूप जलाएं।
  6. जाप: गुप्त नवरात्रि में बीज मंत्रों का विशेष महत्व है। आप “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” या “ॐ दुं दुर्गायै नमः” का यथाशक्ति जप कर सकते हैं।
साधना के नियम: संयम और शुद्धि
गुप्त नवरात्रि की सफलता के लिए सात्विकता अनिवार्य है। नौ दिनों तक भक्त को निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए:
  • पूर्णतः सात्विक भोजन ग्रहण करें (लहसुन-प्याज का त्याग)।
  • वाणी पर नियंत्रण रखें और क्रोध से बचें।
  • ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन करें।
  • अपनी साधना और मंत्रों को गुप्त रखें, किसी के साथ साझा न करें।
आज के अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त
मुहूर्त का नाम
समयावधि
विजय मुहूर्त
दोपहर 02:18 से 03:00 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग
सुबह 11:52 से (अगले दिन शाम 07:14 तक)
निष्कर्ष: माघ गुप्त नवरात्रि केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक गोपनीय मार्ग है। आज अभिजीत मुहूर्त में पूरे श्रद्धा भाव से कलश स्थापित कर आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ कर सकते हैं।