महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। शिव पूजा में बेलपत्र का अर्पण सबसे अहम माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार बिल्वपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। लेकिन बेलपत्र चढ़ाने के कुछ नियम हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है।
बेलपत्र का महत्व क्या है?
बेलपत्र को त्रिदल भी कहा जाता है। इसकी तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। पुराणों में कहा गया है कि बिल्व वृक्ष की उत्पत्ति देवी लक्ष्मी के स्वरूप से हुई है। इसलिए इसे शिव पूजा में सर्वोत्तम सामग्री माना जाता है।
शिवपुराण में उल्लेख है कि बिना बेलपत्र के शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। एक सच्चे भाव से अर्पित बेलपत्र हजारों पुष्पों के बराबर फल देता है।
बेलपत्र चढ़ाने के नियम
1. बेलपत्र का चयन: हमेशा ताजा और हरा बेलपत्र ही चढ़ाना चाहिए। सूखा, फटा या कीड़ा लगा बेलपत्र शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही शुभ माना जाता है।
2. बेलपत्र को धोकर चढ़ाएं: बेलपत्र तोड़ने के बाद उसे स्वच्छ जल से अच्छी तरह धो लें। बिना धोए बेलपत्र अर्पित करना उचित नहीं माना जाता।
3. उल्टा करके रखें: बेलपत्र को शिवलिंग पर उल्टा यानी चिकनी सतह ऊपर और खुरदरी सतह नीचे की ओर रखकर चढ़ाना चाहिए। डंठल का हिस्सा अपनी ओर रहना चाहिए।
4. बेलपत्र तोड़ने का समय: सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन बेलपत्र तोड़ना विशेष शुभ माना जाता है। चतुर्थी, अमावस्या और संक्रांति के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
5. मंत्र का उच्चारण: बेलपत्र चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र या बिल्वाष्टक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
महाशिवरात्रि पर बेलपत्र अर्पण की विधि
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग को जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद चंदन का लेप लगाएं। फिर ताजे बेलपत्र को उल्टा करके शिवलिंग पर रखें।
बेलपत्र रखते समय दोनों हाथों का उपयोग करें। एक बेलपत्र एक बार में ही रखें। बार-बार बेलपत्र को हिलाएं या हटाएं नहीं। पूजा के बाद धूप और दीप जलाएं।
किन बातों का रखें ध्यान
बेलपत्र को कभी भी जमीन पर न रखें। इसे किसी साफ थाली या पत्ते में रखें। एक बार चढ़ाया गया बेलपत्र दोबारा नहीं चढ़ाया जाता। हालांकि कुछ विद्वानों के अनुसार पहले चढ़ाए गए बेलपत्र को धोकर पुनः अर्पित किया जा सकता है, लेकिन ताजा बेलपत्र सर्वोत्तम रहता है।
बेलपत्र को तोड़ते समय पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं। जितनी जरूरत हो उतने ही पत्ते तोड़ें। प्रकृति का सम्मान करना भी शिव भक्ति का हिस्सा है।
बिल्वाष्टक स्तोत्र का पाठ
महाशिवरात्रि पर बेलपत्र चढ़ाते समय बिल्वाष्टक स्तोत्र का पाठ करना विशेष लाभकारी माना जाता है। इस स्तोत्र में बिल्व वृक्ष की महिमा और शिव भक्ति का वर्णन है। इसके पाठ से भक्त को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से एक भी बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करता है, उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि पर यह पुण्य और भी बढ़ जाता है।
महाशिवरात्रि 2026 की तिथि
महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और रात्रि में चार प्रहर की पूजा करते हैं। प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग पर बेलपत्र और जल अर्पित किया जाता है।
महाशिवरात्रि पर सही विधि से बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। नियमों का पालन करते हुए श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है।