उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में होली 2026 के दौरान रंग-गुलाल को लेकर कड़े नियम लागू रहेंगे। मंदिर प्रबंध समिति ने होलिका पर्व 2 और 3 मार्च के लिए जारी निर्देशों में स्पष्ट किया है कि संपूर्ण मंदिर परिसर और महाकाल लोक क्षेत्र में बाहरी रंग-गुलाल का प्रवेश और उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय सुरक्षा और परंपराओं की मर्यादा बनाए रखने के लिए लिया गया है।
मंदिर प्रशासन ने यह भी दोहराया है कि श्रद्धालुओं को जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा। सभी प्रवेश द्वारों पर तैनात निरीक्षक और सुरक्षाकर्मी लगातार जांच करेंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति रंग-गुलाल लेकर परिसर में प्रवेश न कर सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जांच सख्त हो, लेकिन श्रद्धालुओं के साथ व्यवहार विनम्र और सौजन्यपूर्ण रखा जाए।
यह व्यवस्था सिर्फ श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहेगी। मंदिर परिसर और महाकाल लोक में कार्यरत पुजारी, पुरोहित, प्रतिनिधि, अधिकारी, पुलिसकर्मी, कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, सफाई कर्मचारी, सेवक, परिसर के अन्य छोटे-बड़े मंदिरों के पुजारी और आउटसोर्स कर्मचारी भी रंग-गुलाल लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। आपसी रूप से रंग लगाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
प्रशासन ने संबंधित सभी कर्मचारियों और सेवकों को अपने साथ लाए सामान की स्वयं जांच कराकर ही अंदर आने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिबंधित सामग्री अनजाने में भी परिसर तक न पहुंचे। प्रबंधन ने कहा है कि नियमों का पालन हर स्तर पर एक समान तरीके से कराया जाएगा और किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी।
मंदिर के कंट्रोल रूम को भी विशेष रूप से सक्रिय रखा जाएगा। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के जरिए सभी प्रवेश द्वारों और पूरे परिसर की सतत निगरानी करेंगे। निगरानी का दायरा महाकाल लोक तक रहेगा, ताकि रंग-गुलाल या किसी विशेष उपकरण के प्रवेश और उपयोग को तुरंत रोका जा सके।
इन निर्देशों की पृष्ठभूमि में 2024 की वह गंभीर घटना है, जब गर्भगृह में गुलाल उड़ाए जाने के दौरान आग भभक गई थी। इस घटना में सेवक सोनी की मौत हुई थी। उसी के बाद से मंदिर प्रशासन ने होली के अवसर पर गर्भगृह से लेकर बाहरी परिसर और महाकाल लोक तक रंग-गुलाल खेलने पर प्रतिबंध लागू किया था, जिसे हर साल जारी रखा जा रहा है।
त्रिकाल आरती में प्रतीकात्मक हर्बल गुलाल की व्यवस्था
रंग-गुलाल पर प्रतिबंध के बावजूद परंपरा के अनुसार त्रिकाल आरती के दौरान प्रतीकात्मक अर्पण होगा। प्रशासन के निर्देशानुसार भगवान श्री महाकालेश्वर की प्रत्येक आरती में 1-1 किलोग्राम हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा। यह गुलाल मंदिर की कोठार शाखा की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा।
कोठार शाखा से यह सामग्री भस्म आरती पुजारी, शयन आरती पुजारी और शासकीय पुजारी को दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि धार्मिक परंपरा भी बनी रहे और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता भी न हो। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अर्पण केवल निर्धारित पुजारियों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होगा।
उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी
मंदिर प्रबंध समिति ने अपील की है कि होलिका पर्व मंदिर परिसर और महाकाल लोक की गरिमा के अनुरूप हर्षोल्लास, आनंद और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जाए। साथ ही कहा गया है कि जारी आदेशों का अक्षरशः पालन अनिवार्य है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति या कर्मचारी निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामले में व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की ही मानी जाएगी। मंदिर प्रबंधन का फोकस इस बार भी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और परंपरा के संतुलित पालन पर रहेगा।