महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब, महाकाल धाम में 44 घंटे तक चलेगा अखंड पूजन

महाशिवरात्रि 2026 को लेकर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी बड़ी धार्मिक तैयारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां 44 घंटे तक विशेष पूजा क्रम चलेगा और श्रद्धालुओं को 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन एक ही परिसर में कराने की व्यवस्था की जाएगी। यह आयोजन महाशिवरात्रि के दौरान बढ़ने वाली भीड़ और देशभर से आने वाले शिवभक्तों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

महाकालेश्वर मंदिर हर साल महाशिवरात्रि पर प्रमुख केंद्र रहता है, लेकिन 2026 का कार्यक्रम अवधि और स्वरूप दोनों वजहों से अलग माना जा रहा है। 44 घंटे का पूजा क्रम लगातार धार्मिक अनुष्ठानों पर आधारित रहेगा। इसके साथ 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन की व्यवस्था उन श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी मानी जा रही है जो सीमित समय में व्यापक शिवदर्शन करना चाहते हैं।

महाकालेश्वर और महाशिवरात्रि का सीधा संबंध

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां परंपरागत रूप से रात्रिकालीन अनुष्ठान, पूजन और विशेष दर्शन व्यवस्थाएं बनाई जाती रही हैं। 2026 में प्रस्तावित 44 घंटे पूजा इसी परंपरा का विस्तारित रूप है, जिसमें अनुष्ठानिक क्रम लंबी अवधि तक जारी रखने की तैयारी बताई जा रही है।

मंदिर से जुड़ी जानकारी में यह भी सामने आया है कि श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा, ताकि धार्मिक कार्यक्रम प्रभावित न हों और दर्शन प्रवाह बना रहे। महाशिवरात्रि पर आमतौर पर रात से अगले दिन तक भीड़ बनी रहती है, इसलिए लंबे पूजा क्रम के दौरान समय प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

12 ज्योतिर्लिंग दर्शन: क्या है इसका दायरा

आयोजन का दूसरा प्रमुख बिंदु 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन है। इसका उद्देश्य एक ही स्थान पर शिव के सभी ज्योतिर्लिंग स्वरूपों का धार्मिक स्मरण और दर्शन उपलब्ध कराना है। इससे उन भक्तों को सुविधा मिलती है जो अलग-अलग राज्यों में स्थित सभी ज्योतिर्लिंगों तक तत्काल यात्रा नहीं कर पाते।

12 ज्योतिर्लिंग परंपरागत रूप से इन नामों से जाने जाते हैं: सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर। महाशिवरात्रि आयोजन में इन सभी स्वरूपों का सामूहिक दर्शन धार्मिक रूप से विशेष महत्व रखता है।

44 घंटे पूजा का व्यावहारिक असर

44 घंटे तक चलने वाला पूजा क्रम केवल अनुष्ठानिक विस्तार नहीं है, बल्कि यह भीड़ के वितरण का व्यावहारिक मॉडल भी बन सकता है। जब पूजा और दर्शन का समय लंबा होता है, तब अलग-अलग समय स्लॉट में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अवसर मिलते हैं। इससे एक ही समय में अत्यधिक दबाव कम किया जा सकता है।

महाशिवरात्रि जैसे अवसर पर मंदिर क्षेत्र में आवागमन, कतार, दर्शन समय और धार्मिक कर्मकांड एक साथ चलते हैं। ऐसे में लंबी अवधि की योजना से प्रशासनिक और धार्मिक दोनों पक्षों को संतुलित करने में मदद मिलती है। हालांकि अंतिम संचालन स्थानीय व्यवस्था और मौके की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन को भी गति

महाकालेश्वर से जुड़े बड़े आयोजनों का असर मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन पर भी पड़ता है। महाशिवरात्रि 2026 के लिए घोषित इस तरह की व्यवस्थाएं केवल स्थानीय भक्तों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से यात्रियों को आकर्षित करती हैं। 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन जैसी अवधारणा व्यापक धार्मिक भागीदारी को बढ़ाने वाली मानी जाती है।

कुल मिलाकर, महाशिवरात्रि 2026 में महाकालेश्वर मंदिर का प्रस्तावित कार्यक्रम दो स्पष्ट तथ्यों पर केंद्रित है—44 घंटे का पूजा क्रम और 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन। इसी वजह से यह आयोजन श्रद्धालुओं, तीर्थ यात्रियों और धार्मिक आयोजनों को ट्रैक करने वालों के लिए खास महत्व रखता है। आने वाले समय में विस्तृत समय-सारणी और व्यवस्थाओं की आधिकारिक जानकारी के साथ तस्वीर और स्पष्ट होगी।