महाशिवरात्रि पर काशी में अद्भुत संयोग, पहली बार मथुरा से आएंगे बाबा विश्वनाथ के विवाह वस्त्र और श्रृंगार

वाराणसी। महाशिवरात्रि का पर्व इस बार काशी में एक ऐतिहासिक और अद्भुत संयोग का गवाह बनने जा रहा है। सदियों की परंपरा में पहली बार, बाबा विश्वनाथ के विवाह के लिए वैवाहिक वस्त्र और श्रृंगार की सामग्री भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से लाई जाएगी। यह अनूठा आयोजन ‘हरि’ (भगवान विष्णु) और ‘हर’ (भगवान शिव) के मिलन का प्रतीक होगा, जो काशी की गलियों में शैव और वैष्णव परंपराओं के संगम की नई गाथा लिखेगा।

इस अनूठी पहल की जिम्मेदारी मथुरा-वृंदावन स्थित ‘कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास’ ने ली है। न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 24 फरवरी को यह विशेष सामग्री लेकर वाराणसी पहुंचेगा और 25 फरवरी को इसे काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास को सौंपेगा।

मथुरा से आएंगे ये खास वस्त्र और श्रृंगार

भगवान शिव के विवाह के लिए मथुरा से आने वाली सामग्री में कई विशेष वस्तुएं शामिल हैं। बाबा विश्वनाथ के लिए खादी सिल्क से बना एक विशेष वस्त्र तैयार किया गया है। इसके अलावा एक आकर्षक सेहरा, मुकुट, विशेष माला और दुपट्टा भी लाया जाएगा।

श्रृंगार को और दिव्य बनाने के लिए कन्नौज से गुलाब, चंदन और केसर जैसे विशेष इत्र भी लाए जाएंगे। भोग के लिए ब्रज के प्रसिद्ध मिष्ठान और फल भी इस भेंट का हिस्सा होंगे।

विवाह की रस्मों का पूरा कार्यक्रम

काशी विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि विवाह उत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। विवाह की विभिन्न रस्में इस प्रकार आयोजित की जाएंगी:

22 फरवरी: बाबा विश्वनाथ की तिलकोत्सव की रस्म।

23 फरवरी: हल्दी की रस्म।

24 फरवरी: मेहंदी की रस्म और मथुरा से प्रतिनिधिमंडल का आगमन।

25 फरवरी: मथुरा से लाए गए वस्त्र और श्रृंगार मंदिर न्यास को सौंपे जाएंगे और सेहरा बंदी की रस्म होगी।

26 फरवरी: महाशिवरात्रि पर बाबा का भव्य विवाह समारोह।

27 फरवरी: गौना की पारंपरिक रस्म।

3 मार्च: रंगभरी एकादशी पर बाबा अपनी दुल्हन गौरा के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे।

शैव-वैष्णव एकता का संदेश

इस पहल का उद्देश्य शैव और वैष्णव भक्तों के बीच की दूरी को पाटकर सामाजिक समरसता और एकता का संदेश देना है। आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन भारत की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत करेगा।

“यह हरिहर मिलन का एक प्रयास है। भगवान कृष्ण की नगरी से उनके आराध्य भगवान शिव के लिए विवाह की सामग्री भेजना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। इससे दोनों समुदायों के बीच प्रेम और सद्भाव बढ़ेगा।” — महेंद्र प्रताप सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास

काशी में होने वाला यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान होगा, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का एक जीवंत प्रदर्शन भी होगा। पहली बार हो रहे इस हरि-हर मिलन को लेकर भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।