मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) द्वारा आयोजित आबकारी आरक्षक भर्ती-2024 में सामने आए पेपर लीक कांड ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रतलाम स्थित परीक्षा केंद्र पर हुई गड़बड़ी के बाद 12 परीक्षार्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन परीक्षा संचालन का जिम्मा संभालने वाली मुंबई की कंपनी Aptech Limited का नाम रिपोर्ट में शामिल न होने से विवाद और गहरा गया है। यही वजह है कि अब इस पूरे प्रकरण में एजेंसी की भूमिका को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
पेपर लीक का खुलासा होने के बाद ईएसबी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रतलाम के Ratlam Public School परीक्षा केंद्र को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया है। आदेश के मुताबिक, फिलहाल इस केंद्र पर किसी भी प्रकार की भर्ती या प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यहीं से गड़बड़ी के संकेत मिले थे, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया।
मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, जिन 12 अभ्यर्थियों पर कार्रवाई की गई है, उन्होंने परीक्षा के दौरान महज आधे घंटे में प्रश्नपत्र हल कर लिया था। जांच में सामने आया कि इन अभ्यर्थियों का पिछला परीक्षा रिकॉर्ड औसत से भी नीचे रहा है—पूर्व में पुलिस भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इनके अंक 50 से ऊपर नहीं पहुंचे थे। लेकिन आबकारी आरक्षक भर्ती में अचानक 90 से अधिक अंक और 100 पर्सेंटाइल हासिल करना संदेह का कारण बना। ईएसबी ने हाई पर्सेंटाइल प्राप्त करने वाले टॉपर्स के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें यह असामान्य पैटर्न सामने आया।
सीसीटीवी फुटेज और परीक्षा डेस्क के डिजिटल डेटा की जांच में यह संकेत मिले कि परीक्षा केंद्र पर किसी बाहरी व्यक्ति की मदद से प्रश्न हल कराए गए। सूत्रों के मुताबिक, तकनीकी माध्यम से स्क्रीन शेयरिंग या अन्य तरीकों से सहायता दिए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर जांच अभी जारी है और पुलिस डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि परीक्षा संचालन का ठेका लेने वाली Aptech Limited का नाम एफआईआर में क्यों नहीं जोड़ा गया। जानकारी के अनुसार, इस कंपनी को उत्तर प्रदेश और असम में पूर्व में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर इसके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने की बात सामने आई है। ऐसे में विपक्ष और अभ्यर्थी संगठन यह मांग कर रहे हैं कि जांच के दायरे में एजेंसी की भूमिका को भी स्पष्ट किया जाए।
पूरा मामला 2024 में आयोजित आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसका परिणाम 5 फरवरी को घोषित किया गया था। रिजल्ट जारी होने के बाद जब असामान्य रूप से उच्च अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की प्रोफाइल जांची गई, तभी यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। अब इस प्रकरण ने एक बार फिर राज्य में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और मॉनिटरिंग सिस्टम पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।