मार्च 2026 के धार्मिक कैलेंडर में एकादशी व्रत को लेकर रुचि बढ़ी है। खास तौर पर पापमोचनी एकादशी और कामदा एकादशी की तिथि, व्रत का समय और पारण मुहूर्त को लेकर लोग जानकारी जुटा रहे हैं। हिंदू परंपरा में हर माह दो एकादशी आती हैं, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर और चंद्र तिथि का तालमेल समझना जरूरी होता है।
एकादशी की गणना चंद्र मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि से होती है। इसी क्रम में पापमोचनी एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी माना जाता है, जबकि कामदा एकादशी शुक्ल पक्ष में आती है। मार्च 2026 की सूची देखते समय कई लोग यह भी नोट करते हैं कि कुछ पंचांगों में तिथि का प्रभाव महीने की सीमा के पास दिख सकता है। यही कारण है कि व्रत का सही दिन जानने के लिए केवल तारीख नहीं, तिथि की शुरुआत और समाप्ति भी देखनी पड़ती है।
एकादशी तय कैसे होती है
धार्मिक व्रतों में एकादशी का निर्धारण अंग्रेजी तारीख से नहीं, तिथि से होता है। तिथि सूर्योदय से पहले शुरू होकर अगले दिन तक जा सकती है। इसलिए अलग-अलग शहरों में सूर्योदय समय के कारण व्रत और पारण का व्यवहारिक समय थोड़ा बदल जाता है। पंचांग में दी गई तिथि का आरंभ और अंत, दोनों देखना जरूरी माना जाता है।
व्रत रखने वाले सामान्य तौर पर दशमी से ही सात्विक आहार और नियम शुरू करते हैं। एकादशी के दिन उपवास, जप, पाठ और विष्णु पूजा की परंपरा है। अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण किया जाता है। पारण का समय छूटने पर व्रत की पूर्णता प्रभावित मानी जाती है, इसलिए समय की पुष्टि पहले से करना उपयोगी रहता है।
पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व
पापमोचनी एकादशी को वैष्णव परंपरा में प्रायश्चित और आत्मसंयम से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्रस्मरण और दान का विशेष फल मिलता है। कई परिवार इस दिन अन्न त्यागकर फलाहार या निर्जल व्रत करते हैं, हालांकि व्रत का प्रकार व्यक्ति की क्षमता और परंपरा के अनुसार रखा जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में इस एकादशी को आचरण सुधार और अनुशासन से भी जोड़ा गया है। इसी वजह से यह व्रत केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवनशैली के संयम का भी दिन माना जाता है। घरों में विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या भजन-कीर्तन का आयोजन भी इस दिन किया जाता है।
कामदा एकादशी क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है
कामदा एकादशी को भी भगवान विष्णु की उपासना के प्रमुख व्रतों में गिना जाता है। परंपरागत मान्यताओं में इसे मनोकामना पूर्ति और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूरी के संकल्प से जोड़ा गया है। इस दिन व्रती पूजा के साथ दान-पुण्य, संयम और सत्संग पर जोर देते हैं।
कई क्षेत्रों में कामदा एकादशी पर मंदिरों में विशेष पूजा और सामूहिक पाठ कराए जाते हैं। जो लोग पहली बार व्रत रख रहे हों, वे पहले से पारण का समय और व्रत-विधि नोट कर लेते हैं। इससे तिथि भ्रम, समय चूक और अनियमितता की संभावना कम होती है।
तिथि, मुहूर्त और पारण में किन बातों का रखें ध्यान
एकादशी व्रत के लिए सबसे पहले विश्वसनीय पंचांग या मंदिर से जारी समय-सूची देखें। तिथि कब शुरू हो रही है, कब समाप्त हो रही है और द्वादशी पारण का उपयुक्त समय क्या है, यह तीनों बिंदु अनिवार्य हैं। यदि तिथि सूर्योदय से पहले बदल रही हो तो स्थानीय नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाता है।
धार्मिक जानकार आम तौर पर सलाह देते हैं कि व्रत से पहले संकल्प स्पष्ट करें और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार उपवास का प्रकार चुनें। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या दवा ले रहे लोग चिकित्सकीय सलाह के साथ व्रत का स्वरूप तय करते हैं। श्रद्धा के साथ नियम पालन और समय पर पारण, व्रत की मूल प्रक्रिया मानी जाती है।
मार्च 2026 में पापमोचनी और कामदा एकादशी को लेकर रुचि इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि ये दोनों व्रत वार्षिक धार्मिक कैलेंडर में प्रमुख स्थान रखते हैं। अंतिम पुष्टि के लिए स्थानीय पंचांग, मंदिर सूचना या प्रमाणित ज्योतिषीय समय-सारिणी देखना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।