भोपाल: राजधानी भोपाल का जंबूरी मैदान मंगलवार को किसानों के उत्साह और उमंग का केंद्र बना, जहां प्रदेश के कोने-कोने से हजारों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ एक विशाल समागम के लिए एकत्रित हुए। इस आयोजन ने सरकार के ‘कृषि कल्याण वर्ष’ की परिकल्पना को जमीन पर उतारते हुए किसानों और सरकार के बीच एक नए संवाद की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह एकत्रीकरण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समृद्ध किसान और समृद्ध प्रदेश की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का किसान-केंद्रित मॉडल अब जमीन पर साकार हो रहा है, जिसका लक्ष्य गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देना और कृषि को एक उद्योग का स्वरूप प्रदान करना है। आयोजन स्थल पर ड्रोन से की गई निगरानी में ट्रैक्टरों की लंबी कतारें और किसानों का हुजूम देखने को मिला।
आधुनिक कृषि प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
किसान समागम के साथ-साथ आयोजित की गई आधुनिक कृषि प्रदर्शनी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही। इस प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों पर भविष्य की खेती से जुड़ी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। यहां किसानों ने ड्रोन तकनीक, आधुनिक सिंचाई पद्धतियों और नवाचारों के बारे में जानकारी ली। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीक से जोड़कर खेती को और अधिक लाभकारी बनाना था।
कई स्टॉलों पर युवा किसानों और महिला स्वयं-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी भी देखी गई, जो यह दर्शाती है कि प्रदेश का कृषि क्षेत्र अब नवाचार और उद्यमिता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
‘किसान रथ’ से योजनाओं का सीधा संवाद
सरकार की योजनाओं को सीधे किसानों तक पहुंचाने के लिए ‘किसान रथों’ की भी शुरुआत की गई। ये रथ गांवों में जाकर किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे। इसे सरकार और किसानों के बीच की दूरी को कम करने और सीधा संवाद स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
इस पूरे आयोजन को मध्य प्रदेश की कृषि नीति में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जहां तकनीक, संवाद और सम्मान के माध्यम से किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।