नई दिल्ली/वाशिंगटन/तेहरान: (अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग) मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध अपने आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं।
एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए शांति का हाथ बढ़ाया, तो दूसरी तरफ चंद मिनटों बाद ही कतर पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक तेल टैंकर को निशाना बनाए जाने की खबरों ने दुनिया को दहला दिया है। इस बीच, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ निर्णायक सैन्य कार्रवाई का एलान कर दिया है।
1. ईरान की ‘दोहरी चाल’ या मजबूरी?
शनिवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक अप्रत्याशित बयान जारी कर पड़ोसी देशों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि ईरान अब किसी भी पड़ोसी देश पर हमला नहीं करेगा, बशर्ते उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न हो।
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माफी का आधार: राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिनों में अनजाने में पड़ोसी देशों को निशाना बनाया गया।
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मंजूरी: ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने इस शांति प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी।
हालांकि, इस बयान के कुछ ही समय बाद कतर पर हमले की खबरें आईं, जिसने ईरान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में ईरान अब तक इजराइल समेत मध्य-पूर्व के 13 देशों को निशाना बना चुका है।
2. अमेरिका की ‘ब्लैकआउट’ चेतावनी: सबसे बड़ा हमला आज रात
ईरान की हरकतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज से कहा कि आज रात ईरान पर अब तक का सबसे विनाशकारी हमला किया जाएगा।
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लक्ष्य: इस सैन्य ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान के मिसाइल लॉन्चरों और उनके निर्माण केंद्रों (Factories) को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
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ट्रम्प की शर्त: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण (Unconditional Surrender) करना होगा। इसके जवाब में पेजेशकियन ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका का यह सपना कभी पूरा नहीं होगा।
3. भारत के कोच्चि में रुका ईरानी युद्धपोत ‘IRIS लावन’
युद्ध के बीच एक दिलचस्प कूटनीतिक मोड़ भारत में देखने को मिला है। ईरान का युद्धपोत IRIS लावन वर्तमान में भारत के कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा है।
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तकनीकी खराबी: 28 फरवरी को खराबी आने के बाद ईरान ने भारत से मदद मांगी थी।
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भारतीय मानवीय मदद: भारत ने 1 मार्च को अनुमति दी और 4 मार्च को जहाज डॉक हुआ। फिलहाल 183 क्रू मेंबर भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं।
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पिछला इतिहास: हाल ही में श्रीलंका के पास अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत ‘IRIS देना’ को डुबा दिया था, जिसमें 87 नौसैनिकों की मौत हुई थी।
4. युद्ध के मैदान से अन्य बड़े अपडेट्स
वर्तमान स्थिति अत्यंत भयावह है। युद्ध के आठवें दिन के आंकड़े और घटनाक्रम कुछ इस प्रकार हैं:
मुख्य बिंदु |
विवरण |
हताहतों की संख्या |
अमेरिकी-इजराइली हमलों में ईरान में अब तक 1332 लोगों की मौत। |
बुनियादी ढांचा |
ईरान के 14 मेडिकल सेंटर तबाह, कई शहरों में बिजली-पानी ठप। |
सैन्य नुकसान |
दावा है कि ईरान के 300 से अधिक मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए जा चुके हैं। |
ईरानी पलटवार |
ईरान का दावा है कि उसने कुवैत, बहरीन और UAE में 20 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुँचाया है। |
5. होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: तेल टैंकर पर ड्रोन हमला
ईरान की IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) ने फारस की खाड़ी में माल्टा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘प्राइमा’ को ड्रोन से निशाना बनाया है। ईरान का तर्क है कि टैंकर ने उनकी नौसैनिक चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। इस घटना से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
6. नया मोर्चा: कुर्द लड़ाकों की जमीनी कार्रवाई की तैयारी
इराक में मौजूद ईरानी कुर्द संगठन ‘खबात’ के महासचिव बाबाशेख होसेनी ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान के भीतर जमीनी अभियान शुरू कर सकते हैं।
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अमेरिकी संपर्क: होसेनी ने दावा किया कि अमेरिका ने बिचौलियों के जरिए उनसे संपर्क किया है और पूछा है कि वर्तमान ईरानी शासन से निपटने के क्या रास्ते हो सकते हैं।
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हथियारों की मांग: कुर्द लड़ाकों ने स्पष्ट किया है कि यदि वे युद्ध में उतरते हैं, तो उन्हें आधुनिक सैन्य उपकरणों और विस्फोटकों की आवश्यकता होगी।