Share Market Update: वैश्विक तनाव और मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बादलों ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण आज, 12 मार्च को लगातार दूसरे दिन बाजार में भारी बिकवाली देखी जा रही है।
शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 600 अंक फिसलकर 76,300 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 200 अंकों की गिरावट के साथ 23,700 के महत्वपूर्ण स्तर पर कारोबार कर रहा है।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
कच्चे तेल में उछाल: वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 9% की भारी बढ़त के साथ 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा और महंगाई दर (Inflation) में इजाफा होगा।
सप्लाई चेन पर संकट: युद्ध की स्थिति ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है, जिससे ऑटो और मेटल सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ने का डर है।
विदेशी निवेशकों (FII) का पलायन: 11 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से ₹4,672 करोड़ की भारी निकासी की। मार्च महीने में अब तक FII लगभग ₹39,116 करोड़ के शेयर बेच चुके हैं।
सेक्टर का हाल और ग्लोबल संकेत
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मार ऑटो, बैंकिंग, मेटल और FMCG शेयर्स पर पड़ी है। इन सेक्टर्स में निवेशकों ने मुनाफावसूली और डर के कारण बिकवाली तेज कर दी है।
एशियाई बाजारों में भी हाहाकार मचा हुआ है। जापान का निक्केई 1.50% और साउथ कोरिया का कोस्पी 1.30% तक टूट चुके हैं। अमेरिकी बाजार (डाउ जोन्स) भी बीते सत्र में करीब 289 अंक गिरकर बंद हुआ था, जिसका सीधा असर भारतीय ओपनिंग पर पड़ा।
घरेलू निवेशकों (DII) ने ₹4,965 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के सामने यह अपर्याप्त नजर आ रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजार में और अस्थिरता देखी जा सकती है।