प्रदेश में निर्माण गतिविधियों को गति देने और श्रमिकों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। अब मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल में पंजीकृत और वैध परिचय पत्र धारक निर्माण श्रमिकों के लिए आवश्यकता के अनुरूप रैन बसेरे स्थापित किए जाएंगे। ये श्रमिक जब भी काम के सिलसिले में एक जिले से दूसरे जिले या शहर से गांव की ओर जाएंगे, तो उन्हें अस्थायी ठहराव के लिए सुरक्षित स्थान मिल सकेगा। न्यूनतम शुल्क पर रहने की सुविधा के साथ भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उन्हें खुले में या असुरक्षित स्थानों पर रुकने की मजबूरी न हो। इस पहल से अवैध झुग्गी-झोपड़ियों के निर्माण में भी कमी आने की उम्मीद है और श्रमिकों को गरिमापूर्ण जीवन परिस्थितियां मिल सकेंगी।
यह नई व्यवस्था ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर पालिका स्तर पर लागू की जाएगी। राज्य सरकार ने पूर्व में इस विषय से संबंधित सभी नियमों और योजनाओं को समाप्त करते हुए “निर्माण श्रमिक रैन बसेरा योजना 2026” लागू करने का निर्णय लिया है। श्रम विभाग द्वारा इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे पूरे प्रदेश में प्रभावी कर दिया गया है। योजना का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के लिए स्थायी और व्यवस्थित आवासीय ढांचा तैयार करना है, ताकि वे कार्यस्थल के निकट सुरक्षित वातावरण में रह सकें और उनकी उत्पादकता भी बढ़े।
योजना के तहत रैन बसेरों के निर्माण के लिए शासकीय भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर परिषद तथा नगर पालिका मुख्यालय क्षेत्रों में आवश्यकता और क्षमता के आधार पर भूमि का चयन किया जाएगा। चयनित भूमि को श्रम विभाग के नाम आवंटित करने की प्रक्रिया संबंधित सहायक आयुक्त या जिला स्तर के अधिकृत अधिकारी द्वारा पूरी की जाएगी। वित्तीय सहायता के रूप में भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल नगर पालिकाओं को अधिकतम 50 लाख रुपये, नगर परिषद एवं नगर पंचायतों को 30 लाख रुपये तथा ग्राम पंचायतों को 15 लाख रुपये तक की राशि प्रदान करेगा। यदि निर्माण लागत इससे अधिक होती है, तो अतिरिक्त व्यय संबंधित नगरीय निकाय या पंचायत द्वारा वहन किया जाएगा।
प्रदत्त राशि से केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि भवन की साज-सज्जा, सीसीटीवी कैमरे, फर्नीचर, अलमारी, पलंग, बिस्तर, लॉकर और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाएगी। प्रत्येक रैन बसेरे में कितने श्रमिकों के ठहरने की व्यवस्था होगी, इसका निर्धारण स्थानीय जरूरत के अनुसार किया जाएगा। जिला स्तरीय समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि जिस क्षेत्र में रैन बसेरा प्रस्तावित है, वहां पहले से कोई अन्य रैन बसेरा संचालित तो नहीं है। यदि है, तो उसकी ऑक्यूपेंसी दर का आकलन कर नई आवश्यकता का निर्णय लिया जाएगा।
रैन बसेरे में ठहरने के लिए प्रति रात्रि उपयोग शुल्क का निर्धारण जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। यह शुल्क इतना संतुलित रखा जाएगा कि श्रमिकों पर आर्थिक बोझ न पड़े, साथ ही रखरखाव और संचालन की लागत भी निकल सके। योजना में वाणिज्यिक उपयोग की संभावना भी रखी गई है। परिसर में छोटी दुकानों के लिए स्थान आरक्षित किया जा सकता है, जिन्हें किराए या लीज पर देकर राजस्व अर्जित किया जाएगा। इसी आय से बिजली, पानी, स्वच्छता और अन्य संचालन संबंधी खर्च पूरे किए जाएंगे। मंडल द्वारा रखरखाव के लिए अलग से अनुदान नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसकी जिम्मेदारी जिला स्तरीय समिति पर होगी।
महिला और पुरुष श्रमिकों की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग डोरमेट्री की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। भोजन बनाने और खाने के लिए पृथक स्थान उपलब्ध रहेगा। इसके अतिरिक्त महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय एवं स्नानगृह बनाए जाएंगे। महिला श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय, जैसे सीसीटीवी निगरानी और उपयुक्त स्टाफ की तैनाती की जाएगी। रैन बसेरे के संचालन के लिए नियुक्त कर्मचारियों के लिए भी अलग कक्ष की व्यवस्था होगी। इस प्रकार यह योजना न केवल आवासीय सुविधा प्रदान करेगी, बल्कि श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगी।