मीका सिंह का बड़ा ऐलान: आवारा कुत्तों के लिए 10 एकड़ जमीन देंगे, सुप्रीम कोर्ट से की खास अपील

New delhi : देश में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही बहस के बीच, मशहूर पंजाबी गायक और एक्टर मीका सिंह ने एक बड़ी पेशकश की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि कुत्तों के खिलाफ कोई हानिकारक फैसला न लिया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने इन जानवरों के लिए शेल्टर बनाने हेतु अपनी 10 एकड़ जमीन दान करने की इच्छा जताई है।

मीका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए यह बात कही। उनका यह कदम ऐसे समय में आया है जब आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई चल रही है। मीका की इस पहल को पशु प्रेमियों का समर्थन मिल रहा है।

10 एकड़ जमीन दान करने की पेशकश

मीका सिंह ने आवारा कुत्तों के प्रति हमदर्दी दिखाते हुए कहा कि वह उनकी भलाई के लिए अपनी निजी जमीन देने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास पर्याप्त जमीन है और वह कुत्तों के लिए शेल्टर और अन्य जरूरी सुविधाएं बनाने के लिए 10 एकड़ जमीन खुशी-खुशी दान कर सकते हैं।

“मीका सिंह माननीय सुप्रीम कोर्ट से विनम्र निवेदन करते हैं कि कृपया कुत्तों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम से परहेज करें। मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूं कि मेरे पास पर्याप्त जमीन है। मैं 10 एकड़ जमीन दान करने के लिए तैयार हूं।” — मीका सिंह

गायक का मानना है कि इस जमीन पर कुत्तों के लिए जरूरी सुविधाएं बनाई जा सकती हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

सिर्फ जमीन नहीं, देखभाल भी जरूरी

मीका सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ जमीन देना ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि इन शेल्टर्स में कुत्तों की सही देखभाल के लिए अच्छे कर्मचारी और केयरटेकर की भी जरूरत होगी। उनके अनुसार, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कुत्तों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही है सुनवाई

मीका सिंह की यह अपील ऐसे समय में आई है जब सुप्रीम कोर्ट में स्ट्रीट डॉग मैनेजमेंट का मामला चर्चा में है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाने का कोई आदेश नहीं दिया है।

अदालत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 का ठीक से पालन हो। अदालत ने माना कि कुत्तों के काटने के बढ़ते मामलों और नगर निगमों की तरफ से नियमों को लागू करने में विफलता के कारण उन्हें इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। मीका की यह पेशकश इस गंभीर मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ सकती है।