Jabalpur News: मध्य प्रदेश की ‘संस्कारधानी’ जबलपुर से सत्ता के अहंकार और प्रशासनिक मर्यादाओं को तार-तार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मोहन सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह पर जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ और 2021 बैच के आईएएस अधिकारी अरविंद शाह को अपने बंगले पर बंधक बनाकर अपमानित करने, अभद्र गालियां देने और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे है।
इस घटना के बाद से आईएएस अधिकारी गहरे सदमे और डिप्रेशन में हैं, जिससे पूरे प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
विवाद की जड़: अटेंडेंस रिकॉर्ड और एक कर्मचारी का वेतन
सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि घटनाक्रम की शुरुआत 17 मार्च 2026 से होती है, जब आईएएस अरविंद शाह ने जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ का पदभार संभाला। अनुशासन प्रिय अधिकारी के रूप में पहचाने जाने वाले शाह ने कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए कर्मचारियों के अटेंडेंस रिकॉर्ड की जांच कराई।
जांच में छह कर्मचारी बिना किसी सूचना के गायब पाए गए, जिनमें एक नाम दिलप्रीत कौर भल्ला का भी था। नियमों के तहत शाह ने स्पष्टीकरण मिलने तक इन कर्मचारियों का वेतन रोक दिया। 22 अप्रैल को जब शाह ने दिलप्रीत कौर को दफ्तर बुलाकर पूछताछ की, तो उनकी अनियमितता उजागर हो गई। इसके कुछ ही घंटों बाद सत्ता के गलियारों से ‘बुलावा’ आया, जिसने एक पेशेवर अधिकारी के करियर को मानसिक प्रताड़ना के दौर में धकेल दिया।
मंत्री आवास पर 30 मिनट का ‘तांडव’
शिकायत के अनुसार, 22 अप्रैल की दोपहर आईएएस अरविंद शाह को मंत्री राकेश सिंह के बंगले पर तलब किया गया। शाह शिष्टाचार के नाते हाथ में गुलदस्ता लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां का माहौल हिंसक था। आरोप है कि जैसे ही मंत्री को पता चला कि शाह ही सीईओ हैं, उन्होंने न केवल गुलदस्ता लेने से इनकार कर दिया, बल्कि अगले 30 मिनट तक गालियों की बौछार कर दी।
शिकायत में लगाए गए संगीन आरोप:
धमकी: मंत्री ने कथित तौर पर कहा, “मेरे एक इशारे पर पूरी सिख कौम तलवारें लेकर तुम्हें खत्म कर देगी।”
व्यक्तिगत अपमान: अधिकारी के चयन (IAS Selection) पर सवाल उठाए गए और उनकी मां तक को भद्दी गालियां दी गईं।
राजनीतिक रसूख का प्रदर्शन: मंत्री ने धमकी दी कि उन्होंने मुख्यमंत्री से बात कर ली है और उन्हें उनके गृह नगर सिंगरौली तक ‘परेड’ कराकर भेजा जाएगा।
सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि आईएएस शाह की स्थिति इतनी भयावह थी कि उन्होंने अपनी जान और सम्मान बचाने के लिए मंत्री, संबंधित महिला कर्मचारी और उनके पिता से तीन-तीन बार हाथ जोड़कर बिना शर्त माफी मांगी। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर राम अहिरवार बीच-बचाव करते रहे, लेकिन सत्ता के मद में चूर मंत्री का गुस्सा शांत नहीं हुआ। बाद में जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह भी पहुंचे, लेकिन मंत्री के तेवर टस से मस नहीं हुए।
डिप्रेशन में अफसर, आईएएस एसोसिएशन उतरा मैदान में
इस घटनाक्रम ने आईएएस अरविंद शाह को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। वे वर्तमान में डिप्रेशन में बताए जा रहे हैं। उन्होंने अपनी आपबीती मुख्य सचिव अनुराग जैन और एमपी आईएएस एसोसिएशन को विस्तार से बता दी है।
सूत्रो के अनुसार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि अरविंद शाह अपने परिवार के साथ उनसे मिले थे और पूरी घटना की जानकारी दी है। एसोसिएशन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेगा।
दूसरा पक्ष: क्या यह महिला अस्मिता का मामला है या ढाल?
वहीं, दूसरा पक्ष इस पूरी घटना को ‘महिला के अपमान’ से जोड़कर देख रहा है। जबलपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बैठक कर दावा किया है कि आईएएस शाह ने महिला कर्मचारी से बदतमीजी की थी। स्थानीय स्तर पर यह नैरेटिव चलाया जा रहा है कि मंत्री ने एक महिला के सम्मान की रक्षा के लिए अधिकारी को फटकार लगाई।
हालांकि, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया (वेतन रोकना) थी जिसे व्यक्तिगत हमले और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। मंत्री पक्ष का यह दावा भी झूठा साबित होता दिख रहा है कि शाह ने ‘लिखित’ में माफी मांगी है। शाह ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने जान बचाने के लिए मौखिक माफी तो मांगी, लेकिन कोई लिखित दस्तावेज नहीं दिया है।
कौन हैं आईएएस अरविंद शाह?
अरविंद शाह मध्य प्रदेश कैडर के 2021 बैच के होनहार अधिकारी हैं। वे मूल रूप से सिंगरौली के रहने वाले हैं और भोपाल के प्रतिष्ठित मैनिट (MANIT) से इंजीनियरिंग कर चुके हैं। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले वे एक नामी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वे अपनी बेदाग छवि और कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
सत्ता बनाम प्रशासन: गहराता संकट
यह मामला केवल एक अधिकारी के अपमान का नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। यदि एक आईएएस अधिकारी कैबिनेट मंत्री के बंगले पर सुरक्षित नहीं है और उसे ‘सिख कौम’ के नाम पर डराया जा रहा है, तो आम जनता और निचले स्तर के कर्मचारियों की क्या स्थिति होगी?
अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर टिकी हैं। क्या वे अपने मंत्री के ‘बेलगाम’ बर्ताव पर लगाम लगाएंगे या फिर एक होनहार अधिकारी का मनोबल टूटने देंगे? आईएएस एसोसिएशन के कड़े रुख के बाद अब यह लड़ाई राजभवन और मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचनी तय है।