भोपाल में शराब दुकानें हटाने की मांग पर मंत्री और विधायक अड़े, पांच इलाकों में भारी विरोध

Bhopal News: राजधानी भोपाल में शराब दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। शहर के अलग-अलग पांच इलाकों में शराब दुकानों के खिलाफ जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।

पॉलीटेक्निक चौराहा स्थित शराब दुकान के सामने प्रदर्शन करते अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता।

खास बात यह है कि इस बार स्थानीय रहवासियों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कद्दावर मंत्री और विधायक भी सड़कों पर उतर आए हैं। मंत्री विश्वास सारंग और विधायक रामेश्वर शर्मा ने स्पष्ट किया है कि रिहायशी इलाकों और मंदिरों के पास शराब दुकानों का संचालन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सेमराकलां: 54 जनसुनवाई और सवा साल का संघर्ष

सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि नरेला विधानसभा के सेमराकलां इलाके में शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर लोग पिछले सवा साल से आंदोलनरत हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे कलेक्टर की जनसुनवाई में अब तक 54 बार शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

नया ठेका होने के बाद जब दुकान नहीं हटी, तो स्थानीय रहवासियों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया है। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में महिलाएं दुकान के सामने भजन-कीर्तन करती नजर आईं। इनकी मांग है कि जब तक दुकान भौतिक रूप से शिफ्ट नहीं हो जाती, भजन-कीर्तन जारी रहेगा।

मंदाकिनी चौराहा: विधायक बोले- ‘माताओं-बहनों का विरोध स्वीकार्य’

सूत्रो के अनुसार कोलार रोड स्थित मंदाकिनी चौराहे पर हाल ही में शिफ्ट हुई शराब दुकान के खिलाफ विधायक रामेश्वर शर्मा ने मोर्चा खोल दिया है। इस दुकान के पीछे जैन मंदिर और घनी बस्ती है। चौराहे पर दुकान होने के कारण दिनभर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा, “यह स्थान घनी आबादी और मंदिर के समीप है, यहाँ शराब दुकान का संचालन स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दुकान को तुरंत यहाँ से हटाया जाए। यहाँ कांग्रेस कार्यकर्ता भी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

पॉलीटेक्निक चौराहा: ABVP का उग्र प्रदर्शन

वहीं प्रोफेसर कॉलोनी के पास मुख्य मार्ग पर स्थित शराब दुकान को लेकर बुधवार को भारी हंगामा हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने दुकान के बोर्ड और बैनर तोड़ दिए। यह इलाका बेहद संवेदनशील है क्योंकि यहाँ से मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वीआईपी का काफिला हर रोज गुजरता है। साथ ही आसपास कई प्रमुख स्कूल और कॉलेज भी हैं। पुलिस को बल प्रयोग कर यहाँ स्थिति संभालनी पड़ी।

गुरुवार को सेमराकलां दुकान के सामने भजन-कीर्तन करतीं महिलाएं।

ऋषिपुरम् में सुंदरकांड का पाठ

अवधपुरी के ऋषिपुरम् इलाके में भी पिछले पांच दिनों से शराब दुकान के विरोध में सुंदरकांड का पाठ किया जा रहा है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि 80 फीट रोड पर पेट्रोल पंप के पास शराब दुकान होने से इलाके का माहौल खराब हो रहा है और शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है।

नियमों का पेच और विभाग का तर्क

इतने विरोध के बावजूद आबकारी विभाग का कहना है कि अधिकांश दुकानें नियमों के दायरे में हैं। आबकारी विभाग अक्सर नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अरेरा कॉलोनी की दुकान है, जिसका मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा। विभाग ने तो 50 मीटर दूर स्थित आर्य समाज मंदिर को ‘नियमों के तहत’ मंदिर मानने से ही इनकार कर दिया था, जिस पर आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कड़ी नाराजगी जताई थी।

निष्कर्ष: भोपाल में वर्तमान स्थिति यह है कि जनता के साथ-साथ अब जनप्रतिनिधियों का दबाव भी प्रशासन पर बढ़ रहा है। सेमराकलां और मंदाकिनी चौराहे की दुकानों की शिफ्टिंग लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन नई जगह की तलाश विभाग के लिए सिरदर्द बनी हुई है। शहर की जनता का साफ कहना है कि विकास के बीच ‘विनाश’ की ये दुकानें बस्तियों से दूर ही रहनी चाहिए।