Bhopal News: मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने नगरीय निकायों में रिक्त चल रहे पदों को भरने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लंबे इंतजार के बाद रविवार को प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षदों) के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। इस नियुक्त को ‘मिशन निकाय’ के तहत संगठन की पकड़ मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
निकायों का गणित: नगर परिषदों और पालिकाओं में नियुक्ति
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, नियुक्तियों का विभाजन इस प्रकार किया गया है:
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123 नगर परिषद: प्रत्येक परिषद में 4-4 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं।
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46 नगर पालिका: यहां प्रत्येक निकाय में 6-6 एल्डरमैन मनोनीत किए गए हैं।
फिलहाल सागर को छोड़कर शेष बुंदेलखंड और चंबल संभाग के निकायों की सूची पर सहमति न बन पाने के कारण उन्हें होल्ड पर रखा गया है।
क्या होती है एल्डरमैन की भूमिका?
नगरीय प्रशासन के नियमों के अनुसार, एल्डरमैन की नियुक्ति का मुख्य आधार उनका प्रशासनिक अनुभव और नगर पालिका अधिनियम की जानकारी होता है।
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मार्गदर्शक की भूमिका: ये परिषद की बैठकों और चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं और विकास कार्यों के लिए सुझाव दे सकते हैं।
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वोट का अधिकार नहीं: एल्डरमैन को परिषद की वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेने का संवैधानिक अधिकार नहीं होता है। इनका कार्यकाल वर्तमान परिषद के साथ या आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई
नियुक्ति के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी नव-नियुक्त सदस्यों को सोशल मीडिया के माध्यम से शुभकामनाएं दीं। सीएम ने कहा:
“आप सभी को शहर के समग्र विकास, सुशासन और जन-भागीदारी बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप अपने अनुभव और समर्पण से ‘विकसित मध्य प्रदेश’ के संकल्प को सिद्ध करेंगे और नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे।”