स्वतंत्र समय, भोपाल
विधानसभा में सोमवार को विधायक चिंतामणि मालवीय ( MLA Chintamani) पहुंचे तो बाहर मीडिया ने उनसे उनके द्वारा दिए गए बयान पर जवाब मांगा। मीडिया के सवाल पर विधायक मालवीय ने कहा कि अभी मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है जब मिलेगा तो उसका जवाब दूंगा,ये मेरा और पार्टी का आंतरिक विषय है।
अधिग्रहण के मुद्दे पर बोले थे MLA Chintamani
उज्जैन के आलोट से विधायक चिंतामणि ( MLA Chintamani ) मालवीय ने जो मुद्दा उठाया वह तो पार्टी स्तर पर भी बर्दाश्त नहीं हुआ। सदन में सिंहस्थ के जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर चिंतामणि मालवीय ने जिस तरह से मुद्दा उठाया और सीएम डॉ. मोहन यादव को निशाने पर लिया उसके बाद पार्टी ने भी उन्हें शो कॉज नोटिस देने में देर नहीं लगाई।
ऐसा कुछ नहीं कहा जिसके लिए माफी मांगी जाए
हालांकि नोटिस मिलने के बाद भी चिंतामणि का कहना था कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा जिसके लिए माफी मांगी जाए। उन्होंने फिर दोहराया कि मैंने सही मुद्दा उठाया है। जनप्रतिनिधि होने के नाते ये मेरा कर्तव्य है कि मैं जनता की आवाज उठाऊं। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी के आलोट से विधायक चिंतामणि मालवीय को पार्टी द्वारा दिए गए नोटिस पर सियासत गरमा गई है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक मालवीय को भेजे नोटिस में कहा, पिछले कुछ समय से आपके द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर सरकार की आलोचना की जा रही है एवं आपके वक्तव्यों व कृत्यों से लगातार पार्टी की प्रतिष्ठा को आघात पहुँच रहा है। आपके इस आचरण से सरकार और पार्टी की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैए जो की अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के निर्देशानुसार आपको सूचित किया जाता है कि इस पत्र प्राप्ति के 7 दिवस के अंदर स्पष्टीकरण देवें। क्यों न आपके विरुद्ध अनुशासनहीनता की कार्यवाही की जाये। नोटिस मिलने के बाद सियासत शुरू हो गई।
भाजपा विधायक के समर्थन में उतरी कांग्रेस
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि नोटिस मिलना था विश्वास सारंग, प्रहलाद पटेल, गोविन्द राजपूत को, लेकिन वो मिला चिंतामणि मालवीय को, क्योंकि भाजपा में एक दलित विधायक द्वारा किसान हित में ‘सच की आवाज’ उठाना अपराध हो गया है। कांग्रेस, भाजपा विधायक के समर्थन में उतर आई है। जीतू पटवारी ने इसे लेकर भाजपा सरकार को घेरा है।